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पानीपत : फिल्म समीक्षा

शनिवार,दिसंबर 7, 2019
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1978 में बीआर चोपड़ा ने संजीव कुमार, विद्या सिन्हा और रंजीता को लेकर 'पति पत्नी और वो' बनाई थी जो खासी पसंद की गई थी। उनके पोतों ने इसी नाम से रीमेक बनाया है। पति-पत्नी के रिश्ते को लेकर खूब लिखा गया है और चुटकुले भी इसी रिश्ते को लेकर सबसे ...
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कमांडो मध्यम बजट में बनाई जाने वाली एक्शन फिल्म की सीरिज़ है जिसमें विद्युत जामवाल वही करते हैं जो सलमान खान 'टाइगर' सीरिज में और टाइगर श्रॉफ 'बागी' सीरिज में करते हैं। कमांडो 3 में विद्युत देश को सलमान की तरह बचाते हैं और टाइगर की तरह गुंडों की ...
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अनीस बज्मी पिछले 25 वर्षों से फिल्में बना रहे हैं और उनका एक ही उद्देश्य है कि उनकी फिल्म देख दर्शक हंसे और खुशी-खुशी घर जाएं। 6 से 80 साल तक के दर्शक वर्ग के लिए वे फिल्म रचते हैं और कॉमेडी के नाम पर अश्लीलता से दूर रहते हैं। यही कारण है कि ...
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मसाला फिल्म बनाना आसान बात नहीं है, लेकिन न जाने क्यों मिलाप ज़वेरी अपने आपको आज का मनमोहन देसाई मानने पर तुले हुए हैं और मसाला फिल्मों को ही बदनाम कर रहे हैं। उनकी ताजा फिल्म 'मरजावां' 1980 में भी रिलीज होती तो भी शर्तिया नापसंद की जाती क्योंकि ...
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'बाला' में गंजेपन के साथ त्वचा के रंग का मुद्दा दिखाया गया है। कहानी कानपुर में सेट है और अब उत्तर प्रदेश को हिंदी फिल्मों में इतना दिखा दिया गया है कि फिल्में टाइप्ड लगने लगी हैं। वहीं गली-मोहल्ले, बड़बोले किस्म के किरदार, स्ट्रीट-स्मार्टनेस ...
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उजड़ा चमन आमतौर पर उस शख्स के लिए कहा जाता है जिसके सिर पर बालों की कमी हो गई हो। फिल्म के नायक चमन कोहली (सनी सिंह) की तो शादी भी नहीं हुई और वह उजड़ा चमन हो गया। 30 वर्ष के चमन को तब जोरदार झटका लगता है जब ज्योतिष कहता है कि यदि उसने 31 के होने ...
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फिल्म में कहा गया है कि कस्टमर बेवकूफ (हालांकि फिल्म में इससे भी बुरा शब्द है) होता है और उसे क्या बेचना है यह हम डिसाइड करते हैं। मेड इन चाइना देख यह बात महसूस होती है कि क्या इसके मेकर्स ने भी यही बात ध्यान में रख कर फिल्म बनाई है? वैसे भी चाइना ...
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हाउसफुल और गोलमाल लोकप्रिय और हास्य फिल्म सीरिज़ हैं, लेकिन दिनों-दिन इन फिल्मों का स्तर नीचे आते जा रहा है और केवल नाम का फायदा उठाने की कोशिश की जा रही है। हाउसफुल का चौथा भाग पिछले तीन भागों में सबसे कमजोर है। माना कि हाउसफुल जैसी फिल्मों को ...
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कुछ करने की चाह हो तो उम्र महज नंबर ही है। चंद्रो तोमर और प्रकाशी तोमर ने साठ के ऊपर होने के बाद शूटिंग में हाथ आजमाया और ढेर सारे पदक अपने नाम किए। इनकी ये सफलता तब और सराहनीय हो जाती है जब वे ऐसी पृष्ठभूमि से आती हैं जहां पर महिलाओं को महज बच्चा ...
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लाल कप्तान एक रिवेंज ड्रामा है, लेकिन इसे कुछ अलग दिखाने के लिए 1780 के आसपास का समय चुना गया है जब बक्सर की लड़ाई खत्म ही हुई थी। मुगलों की जड़ें हिल रही थी और भारत में अंग्रेज पैर पसारने लगे थे। इनाम के लिए शिकार करने वाला शिकारी और साधु, ...
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जन्म और मृत्यु दो छोर हैं और उसके बीच का हिस्सा जिंदगी होता है। कुछ लोग तमाम सुख-सुविधा होने के बावजूद दु:खी रहते हैं और कुछ तमाम अभावों के बावजूद जिंदगी का मजा लेते हुए आगे बढ़ते रहते हैं। इस फलसफे पर आधारित कुछ फिल्में बनी हैं और 'द स्काई इज़ ...
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बाहुबली की विराट सफलता के बाद दक्षिण भारतीय सुपरस्टार्स में खलबली मच गई। अचानक उन्हें लगा कि कल का आया कलाकार प्रभास उनसे आगे निकल गया है। इससे क्या रजनीकांत और क्या चिरंजीवी, सभी में एक बड़ी सफल फिल्म देने की होड़ लग गई। करोड़ों रुपये की फिल्मों का ...
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इन दिनों बॉलीवुड में बड़े बजट की एक्शन फिल्म बनाने की होड़ मची हुई है। विदेश से स्टंट डायरेक्टर्स बुलाए जाते हैं जो कमाल के एक्शन सीन रचते हैं। एक-एक स्टंट पर ही करोड़ों रुपये फूंक दिए जाते हैं और हॉलीवुड की एक्शन फिल्मों जैसा एक्शन दिखाने की कोशिश ...
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धर्मेन्द्र ने सनी देओल को लांच किया था और सनी ने अपने बेटे करण के लिए फिल्म बनाई है। सनी ने करण के लिए बहुत ही कमजोर और आउटडेटेट कहानी चुनी। खुद बहुत काबिल निर्देशक नहीं है, लेकिन खुद ने ही डायरेक्टर बन बहुत बड़ी जिम्मेदारी ले ली। नतीजे में 'पल ...
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आयुष्मान खुराना अभिनीत फिल्म 'ड्रीम गर्ल' का निर्देशन राज शांडिल्य ने किया है जो कि कपिल शर्मा के लिए कई शो लिख चुके हैं। कपिल की शो की सफलता का आंकलन करते समय राज ने संभवत: इस बात पर भी विचार किया होगा कि इस शो में पुरुष, महिला पात्रों में नजर आते ...
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छिछोरे का डायरेक्शन नितेश तिवारी ने किया है। कहानी में होस्टल लाइफ की मस्ती है, पढ़ाई के क्षेत्र में बच्चों पर दबाव का जिक्र है, स्पोर्ट्स कॉम्पिटिशन है, जिंदगी में दोस्तों का महत्व है और अनिरुद्ध-माया की प्रेम कहानी और तलाक का ट्रैक भी है। लेकिन ...
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यदि ज्यादा पैसा लगाने से ही फिल्म बेहतर बन जाती तो लोग हजार करोड़ की फिल्म बना डालते, लेकिन यह फॉर्मूला बिलकुल सही नहीं है। यह बात 350 करोड़ की लागत से तैयार ‍'साहो' देखने के बाद फिर साबित होती है। साहो 174 मिनट की फिल्म है। तकरीबन हर मिनट पर दो ...
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बाटला हाउस में हुए एनकाउंटर पर फिल्म बनाने के लिए लेखक रितेश शाह और निर्देशक निखिल आडवाणी के पास 50 मिनट का कंटेंट मौजूद था। इस पर उन्होंने 146 मिनट की फिल्म बना डाली। यही बात काफी है यह समझाने के लिए कि फिल्म किस तरह की होगी।
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मिशन मंगल भारत की ऐतिहासिक सफलता के साथ न्याय नहीं करती। फिल्म में इस घटना को बहुत ही फिल्मी अंदाज में दिखाया गया है। अक्षय कुमार और विद्या बालन का अभिनय उम्दा है। कुल मिलाकर 'मिशन मंगल' सब मंगल नहीं है।
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