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बुद्ध जयंती पर पढ़ें 11 शुभ बातें, जा‍निए क्या करें इस दिन

शुक्रवार,मई 17, 2019
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भगवान बुद्ध का धर्म पूर्व के कई राष्ट्रों का धर्म है। जिसमें जापान, दक्षिण कोरिया, उत्तर कोरिया, चीन, वियतनाम, ताइवान, थाईलैंड, कंबोडिया, हांगकांग, मंगोलिया, तिब्बत, भूटान, मकाऊ, बर्मा, लागोस और श्रीलंका तो बौद्ध राष्ट्र है ही साथ ही भारत, नेपाल, ...
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कपिलवस्तु के महाराजा शुद्धोदन की धर्मपत्नी महारानी महामाया देवी की कोख से नेपाल की तराई के लुम्बिनी वन में जन्मे सिद्धार्थ ही आगे चलकर बुद्ध कहलाए।
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बुद्ध को महात्मा या स्वामी कहने वाले उन्हें कतई नहीं जानते। बुद्ध सिर्फ बुद्ध जैसे हैं। अवतारों की कड़ी में बुद्ध अंतिम हैं।
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स्वयं के होने को जाने बगैर आत्मवान नहीं हुआ जा सकता। निर्वाण की अवस्था में ही स्वयं को जाना जा सकता है। मरने के बाद आत्मा महा सुसुप्ति में खो जाती है।
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गौतम बुद्ध ने जितने हृदयों की वीणा को बजाया है उतना किसी और ने नहीं। गौतम बुद्ध के माध्यम से जितने लोग जागे
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किसी के प्रति मन में बुरी भावना लाना आदि। इसे सामान्यतः बहुत ही मामूली बात समझा जाता है। परंतु वास्तव में यह मूल्यांकन गलत है।
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लुम्बिनी नेपाल के तराई क्षेत्र में कपिलवस्तु और देवदह के बीच नौतनवा स्टेशन से 8 मील दूर पश्चिम में रुक्मिनदेई नामक स्थान है, जहां बुद्ध का जन्म हुआ था।
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महात्मा गौतम बुद्ध कहते हैं कि- अतीत पर ध्यान मत दो, भविष्य के बारे में मत सोचो, अपने मन को वर्तमान क्षण पर केंद्रित करो।
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भगवान बुद्ध ने एक मध्यम मार्ग खोज निकाला, जिसे अष्टांगिक मार्ग कहते हैं। यह मार्ग शांति, ज्ञान और निर्वाण देने वाला है।
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भगवान बुद्ध ने अपने हाथ से कुछ नहीं लिखा था। उनके उपदेशों को उनके शिष्यों ने पहले कंठस्थ किया, फिर लिख लिया। वे उन्हें पेटियों में रखते थे।
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भगवान बुद्ध का जीवन और उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं। बुद्ध के प्रेरणादायक जीवनदर्शन का जन-जीवन पर अमिट प्रभाव रहा है। आइए जानते हैं वे कौन-सी चार छटनाएं थी, जो सिद्धार्थ को संसार में बांधकर न रख सकीं। आइए जानें...
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अलग-अलग देशों में वहां के रीति-रिवाजों और संस्कृति के अनुसार समारोह आयोजित होते हैं। बुद्ध पूर्णिमा पर ये ग्यारह बातें जानना जरूरी है, जानिए...
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बौद्ध धर्म को भला कौन नहीं जानता। बौद्ध धर्म भारत की श्रमण परंपरा से निकला महान धर्म दर्शन है जिसके संस्थापक भगवान बुद्ध हैं। बौद्ध धर्म में अवलोकितेश्वरा में कुछ खास मंत्रों का उल्लेख किया गया है,
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एक बार भगवान बुद्ध जेतवन विहार में रह रहे थे, भिक्षु चक्षुपाल भगवान से मिलने के लिए आए थे। उनके आगमन के साथ उनकी दिनचर्या, व्यवहार और गुणों की चर्चा भी हुई
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वैशाख पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा भी कहते हैं। यह गौतम बुद्ध की जयंती है और उनका निर्वाण दिवस भी। इसी दिन भगवान बुद्ध को बुद्धत्व की प्राप्ति हुई थी।
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गौतम बुद्ध ने क्रोध करने से सात अनर्थ बताए हैं। उनके अनुसार जो स्त्री या पुरुष क्रोध करता है, उसके शत्रु को इन सात बातों की प्रसन्नता होती है :-
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उस दिन सिद्धार्थ ने बगीचे की सैर की। वह राजमहल में लौटकर सोचने लगा, बुढ़ापा, बीमारी और मौत इन सबसे छुटकारा कैसे मिल सकता है? सिद्धार्थ कैसे बने महात्मा बुद्ध... पढ़ें कथा
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भगवान बुद्ध के अनुसार क्रोध करने से मनुष्य का चेहरा कुरूप हो जाता है। उसे पीड़ा होती है। वह गलत काम करता है। उसकी संपत्ति नष्ट हो जाती है। उसकी बदनामी होती है। उसके मित्र और सगे-संबंधी उसे छोड़ देते हैं और उस पर तरह-तरह के संकट आते हैं।
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बौद्ध धर्म की महायान शाखा में 'ॐ मणि पदमे हूम्‌' इस षडाक्षरीय मंत्र का जप प्रमुख रूप से किया जाता है, जिसका उल्लेख अवलोकितेश्वरा में किया गया है। यह मंत्र सभी प्रकार के खतरों से सुरक्षा के लिए जपा जाता है।
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