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Birth of Ekadashi : इस दिन श्रीहरि से उत्पन्न हुईं थी एकादशी माता, आपने कहीं नहीं पढ़ी होगी यह कथा

गुरुवार,नवंबर 21, 2019
ekadashi mata katha
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जब युधिष्ठिर कहने लगे कि हे भगवन्! आपने हजारों यज्ञ और लाख गौदान को भी एकादशी व्रत के बराबर नहीं बताया, सो यह तिथि सब तिथियों से उत्तम कैसे हुई, बताइए।
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार 26 एकादशियों में उत्पन्ना एकादशी का विशिष्ट महत्व है। अत: जो भक्त एकादशी का व्रत आरंभ करना चाहते हैं उन्हें मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी यानी
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शुक्रवार, 22 नवंबर 2019 को उत्पन्ना एकादशी व्रत पड़ रहा है। भारतीय धर्म संस्कृति में इस एकादशी का बहुत अधिक महत्व माना गया है।
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कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी कहा जाता है। इसे हरि प्रबोधिनी एकादशी और देवोत्थान एकादशी भी कहा जाता है। इस एकादशी का विधि विधान से व्रत रखने पर पितृदोष का निवारण हो जाता है।
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भगवान विष्णु आषाढ़ शुक्ल एकादशी को चार माह के लिए सो जाते हैं और कार्तिक शुक्ल एकादशी को जागते हैं। इस एकादशी के दिन से चतुर्मास का अंत भी हो जाता है। इसीलिए कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी कहा जाता है। इसे हरि प्रबोधिनी एकादशी ...
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हमारे पौराणिक शास्त्रों में रमा (रंभा) एकादशी का बड़ा महत्व बताया गया है। इस एकादशी का महत्व इसल‌िए भी अध‌िक है, क्योंक‌ि यह एकादशी चातुर्मास की अंत‌िम एकादशी है।
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दशहरे के अगले दिन बुधवार 9 अक्टूबर 2019 को आश्विन शुक्ल एकादशी के दिन 'पापाकुंशा एकादशी' व्रत मनाया जा रहा है। इस दिन श्रीहरि विष्णु के पूजन का विशेष महत्व है।
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आश्विन मास के श्राद्ध पक्ष में आने वाली एकादशी 'इंदिरा एकादशी' के नाम से जनमानस में प्रसिद्ध है। इस वर्ष यह एकादशी 25 सितंबर 2019, बुधवार को है। मत-मतांतर तथा तिथियों के मतभेद के चलते कई स्थानों पर यह 24 सितंबर, मंगलवार को भी मनाई जाएगी।
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भाद्रपद शुक्ल एकादशी पद्मा/परिवर्तिनी एकादशी, जयंती और जलझूलनी एकादशी भी कहलाती है। इसका व्रत करने से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है।
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शास्त्रों में एकादशी व्रत का काफी महत्‍व है। भाद्रपद मास में आने वाली इस एकादशी का व्रत रखने से भगवान श्रीहरि विष्णु के साथ माता लक्ष्मी का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है।
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भारतीय हिन्दू संस्कृति में हर महीने की 11वीं तिथि यानी एकादशी (ग्यारस) को व्रत-उपवास किया जाता है। यह तिथि अत्यंत पवित्र तिथि मानी गई है। वर्षभर के प्रत्येक मास में 2 एकादशी तिथियां आती हैं
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श्रावण माह में कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को कामिका एकादशी कहते है। इस बार यह एकादशी 28 जुलाई 2019, रविवार को मनाई जा रही है। इस एकादशी का महत्व एवं कथा यहां पढ़ें...
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देवशयनी एकादशी : पौराणिक व्रत कथा- सूर्यवंश में मांधाता नाम का एक चक्रवर्ती राजा हुआ है, जो सत्यवादी और महान प्रतापी था। वह अपनी प्रजा का पुत्र की भांति पालन किया करता था।
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देवशयनी एकादशी आषाढ़ शुक्ल एकादशी यानि 12 जुलाई 2019 को है। देवशयनी एकादशी के दिन से देवउठनी एकादशी तक भगवान श्रीहरि चार महीने के लिए पाताल लोक में शयन हेतु चले जाते हैं। इसलिए इस चार महीने को चातुर्मास कहा जाता है।
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आषाढ़ कृष्ण एकादशी का नाम योगिनी है। इसके व्रत से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। यह इस लोक में भोग और परलोक में मुक्ति देने वाली है। यह तीनों लोकों में प्रसिद्ध है।
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आषाढ़ कृष्ण ग्यारस के दिन योगिनी एकादशी मनाई जाती है। वर्ष 2019 में यह एकादशी 28 जून, शुक्रवार को मनाई जाएगी। आषाढ़ मास की इस एकादशी का महत्व तीनों लोक में प्रसिद्ध है।
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प्रतिदिन भगवान श्रीहरि का स्मरण करने से जीवन के समस्त संकटों का नाश होता है तथा धन-वैभव की प्राप्ति होती है। अगर प्रतिदिन कोई मंत्र न पढ़ सकें तो कम से कम किसी खास अवसर पर
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वृषभ और मिथुन की संक्रां‍‍ति के बीच ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की जो एकादशी आती है, उसका नाम निर्जला है। इस एकादशी का पुण्य समस्त तीर्थों और दानों से अधिक है। केवल एक दिन मनुष्य निर्जल रहने से पापों से मुक्त हो जाता है।
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गुरुवार, 13 जून 2019 को निर्जला एकादशी मनाई जा रही है। भारतीय उपासना में निर्जला एकादशी का बहुत अधिक महात्म्य माना गया है।
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