चीन और भारत की ऐतिहासिक संस्कृति का मिला-जुला संगम है तिब्बत। भोली-भाली जनता, कठिन पर्वतीय जीवन, धर्म के प्रति आस्था के साथ कड़ी मेहनत का अभ्यास, परंपराओं को निभाते हुए आधुनिक प्रगति की चाह ने तिब्बत को बहुत बदला है। झोपड़ियों के साथ पुराने महल-मठ भी हैं और संपन्न देशों से अधिक सुंदर रेलवे स्टेशन भी।
सुरमई बादलों की चादर और उस पर जहाँ-तहाँ बने सफेद बादलों के पहाड़ को चीरता हुआ हमारा विमान ल्हासा के हवाई अड्डे पर, जो कि शहर से 60 किलोमीटर दूर है, उतरने के लिए तेज हिचकोले लेने लगा। हमारे पत्रकार साथियों के दिल की धड़कनें तेज हो गईं।