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क्षितिज संस्था द्वारा द्वितीय अखिल भारतीय लघुकथा सम्मान समारोह आयोजित

सोमवार,नवंबर 25, 2019
Kshitij Foundation
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हमारी संस्कृति और प्रकृति ने पुरुष को कठोर और दमनवादी तथा स्त्री को कमजोर और पीड़िता मान लिया है। कुछ हद तक इस तथ्य को झुठलाया नहीं जा सकता लेकिन यह अधूरा सच है। वास्तव में इंसान अच्छा या बुरा होता है स्त्री या पुरुष नहीं। कोई स्त्री भी क्रूर, जाहिल ...
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भारत के संदर्भ पत्रकारिता कोई एक-आध दिन की बात नहीं है, बल्कि इसका एक दीर्घकालिक इतिहास रहा है। प्रेस के अविष्कार को पुर्नजागरण एवं नवजागरण के लिए एक सशक्त हथियार के रूप में प्रयुक्त किया गया था।
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कालिदास के लिए अपनी प्रशस्त लेखनी और बेबाक विचारों के माध्यम से पिताजी संघर्षरत रहे, लेकिन आज उनकी जन्मस्थली जो कि उनके दैदीप्य आलोक से जगमगाती रही, सदैव और सतर्क रहने वाली कर्मस्थली आज इतनी निष्प्रभ, निर्लिप्त और सुसुप्तावस्था में क्यों प्रतीत हो ...
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दृष्टिहीन और दृष्टिबाधित बच्चों के प्रति मेरे मन में हमेशा एक जिज्ञासायुक्त संवेदना रही है। ये बच्चे, जिनको हमारी तरह दिखाई नहीं देता, वे भी हमारी तरह ही सृष्टि की हलचल को महसूस करते हैं। आंखें भी कई बार धोखा खा जाती हैं।
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वहां नन्हे किशोर-किशोरियां वीर रस की कविताएं पढ़ रहे थे और श्रोता हॉल में रोमांचित हो रहे थे। एक से बढ़कर एक कविताएं और और एक से बढ़कर एक बच्चे.. निर्णायकों के लिए कठिन घड़ी थी किसे पुरस्कार दें किसे नहीं....शहर के स्कूलों के 26 बच्चे सेंट पॉल उ.मा. ...
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इस संसार में प्रकृति ने प्रत्येक प्राणी को जन्म के साथ भी एक कैमरा दिया है जिससे वह संसार की प्रत्येक वस्तु की छवि अपने दिमाग में अंकित करता है। वह कैमरा है उसकी आंख। इस दृष्टि से देखा जाए तो प्रत्येक प्राणी एक फोटोग्राफर है।
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अब मैं लडूंगी,और जीतूंगी अपनी स्वाभिमान की,सम्मान की लड़ाई और पूरे करूंगी अपने ख्वाब,अपनी हसरतें,ख्वाहिशें अपनी और तुम सुन सकोगे मेरी आजाद रूह से निकली एक गूंज जो तुम्हारे कानों में डालेगी गर्म लावा और तुम्हारे मुंह पर एक तमाचा चटाक चटाक चटाक...
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श्री मध्यभारत हिन्दी साहित्य समिति के सभागार में आयोजित इस समारोह में अतिथियों द्वारा पंकज सुबीर के नए उपन्यास का विमोचन किया गया।
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फ्रांसीसियों की संगीत के प्रति दीवानगी की हद को देखते हुए 21 जून 1982 को आधिकारिक रूप से संगीत-दिवस की घोषणा हुई थी और धीरे-धीरे अब ...यह समूचे विश्व में मनाया जाने लगा है।
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हिन्दी के चर्चित युवा कवि अनुज लुगन समेत 23 उभरते रचनाकारों को साहित्य अकादमी का युवा लेखक पुरस्कार दिया जाएगा जबकि इस वर्ष का बाल साहित्य पुरस्कार हिन्दी के गोविन्द शर्मा समेत 22 लेखकों को दिया जाएगा।
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वहां पेड़ अपनी बातें कह रहे थे, मैं गुलमोहर हूं, मैं पीपल हूं, मैं बरगद हूं... मैं नीम हूं, मैं पलाश हूं.. अवसर था वामा साहित्य मंच की जून माह की मासिक बैठक का, जो पर्यावरण दिवस मनाने के उद्देश्य से अनोखे अंदाज में आयोजित की गई।
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हिन्दी के पहले अखबार के प्रकाशन को 193 वर्ष हो गए हैं। इस अवधि में कई समाचार-पत्र शुरू हुए, उनमें से कई बन्द भी हुए, लेकिन उस समय शुरू हुआ हिन्दी पत्रकारिता का यह सिलसिला बदस्तूर जारी है।
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हिंदी की सुपरिचित पत्रकार और कथाकार निर्मला भुराड़िया के उपन्यास ‘गुलाम मंडी’(सामयिक प्रकाशन से प्रकाशित) को वर्ष 2019 के लिए 12वां सृजनगाथा डॉट कॉम सम्मान हेतु चयनित किया गया है।
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भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में प्रेस की स्वतंत्रता एक मौलिक जरूरत है। भारत में अक्सर प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर चर्चा होती रहती है।
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दुनियाभर में साल में दो दिन पृथ्वी दिवस मनाया जाता है (21 मार्च और 22 अप्रैल) लेकिन, 1970 से हर साल 22 अप्रैल को मनाए जाने वाले विश्व पृथ्वी दिवस का सामाजिक तथा राजनीतिक महत्व है।
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ग्वालियर। देश के प्रख्यात हास्य कवि प्रदीप चौबे का शुक्रवार तड़के दिल का दौरा पड़ने से ग्वालियर में निधन हो गया। वे 70 वर्ष के थे। कवि पवन करन ने बताया कि बीती रात करीब 2.30 बजे चौबे को उनके घर में अचानक दिल का दौरा पड़ा जिससे उनका निधन हो गया।
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पुस्तक लोकार्पण के उपरांत एक परिचर्चा का आयोजन किया जाएगा जिसका विषय है- 'भारत में जमीनी विकास : नई सहस्राब्दी की कथा'।
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वाणी प्रकाशन द्वारा दरियागंज की विस्मृत साहित्यिक परंपरा को पुनर्जीवित करने के लिए आरंभ किए गए कार्यक्रम 'दरियागंज की किताबी शामें' श्रृंखला की दूसरी कड़ी 4 अप्रैल को आयोजित की गई।
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दक्षिण एशिया के सबसे बड़े और पुराने किताबी गढ़ 'दरियागंज' की विस्मृत साहित्यिक शामों को फिर से एक बार विचारों की ऊष्मा से स्पंदित करने के लिए वाणी प्रकाशन
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