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December 27 : महान शायर मिर्ज़ा ग़ालिब की जयंती पर पढ़ें विशेष आलेख

गुरुवार,दिसंबर 26, 2019
Mirza Ghalib
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प्रेमचंद ने 1934 में अजंता सिनेटोन नामक फिल्म कंपनी से समझौता करके फिल्म- संसार में प्रवेश किया। वे बम्बई पहुंचे और 'शेर दिल औरत' और 'मिल मजदूर' नामक दो कहानियां लिखीं। 'सेवा सदन' को भी पर्दे पर दिखाया गया। लेकिन प्रेमचंद मूलतः निष्कपट व्यक्ति थे।
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कवि रवीन्द्रनाथ टैगोर का जन्म 7 मई 1861 को कोलकाता में हुआ था। बचपन से कुशाग्र बुद्धि के रवींद्रनाथ ने देश और विदेशी साहित्य, दर्शन, संस्कृति आदि को अपने अंदर समाहित कर लिया था
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पं. माखनलाल चतुर्वेदी हिन्दी पत्रकारिता और साहित्य के क्षेत्र में एक ऐसा नाम हैं, जिसे छोड़कर हम पूरे नहीं हो सकते। उनकी संपूर्ण जीवनयात्रा, आत्मसमर्पण के खिलाफ लड़ने वाले की यात्रा है।
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देश पर अपनी जान न्यौछावर कर देने वाले शहीद-ए-आजम भगत सिंह ने अपनी मां की ममता से ज्यादा तवज्जो भारत मां के प्रति अपने प्रेम को दी थी।
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आमतौर पर भगतसिंह के बारे में यह एक निर्भ्रांत तथ्य है कि वे एक घोषित नास्तिक थे, फिर भला 'भाग्य' से उनका क्या वास्ता हो सकता है? मगर हो सकता है नहीं, बल्कि था।
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मिर्जा गालिब का जन्म 27 दिसंबर 1717 को काला महल, आगरा में हुआ था। उनकी कलम ने दिल की हर सतह को छुआ, किसी भी मोड़ पर कतराकर नहीं निकले।
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25 दिसंबर 1924 को मध्यप्रदेश के ग्वालियर शहर में अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म हुआ। उनके पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी और मां कृष्णादेवी हैं। वाजपेयी का संसदीय अनुभव 5 दशकों से भी अधिक का विस्तार लिए हुए है। वे पहली बार 1957 में संसद सदस्य चुने गए थे।
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कबीर बीच बाजार और चौराहे के संत हैं। वे आम जनता से अपनी बात पूरे आवेग और प्रखरता के साथ किया करते हैं, इसलिए कबीर परमात्मा को देखकर बोलते हैं ...
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सहज, सौम्य और सरल जिनका मिजाज है, सबकुछ होते हुए भी फकीराना ठाठ, आजाद पंछी की तरह गगन को नापना, मजाक और मस्ती की दुनिया से कविता खोजने वाले, अल्हड़ और मनमौजीपन
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टैगोर दुनिया के संभवत: एकमात्र ऐसे कवि हैं जिनकी रचनाओं को दो देशों ने अपना राष्ट्रगान बनाया। बचपन से कुशाग्र बुद्धि के रवींद्रनाथ ने देश और विदेशी साहित्य, दर्शन, संस्कृति आदि को अपने अंदर समाहित कर लिया था
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18 जनवरी 2018 की ठंड भरी शाम...कोलकाता के बेलियाहाटा इलाके से हिंदी के लब्धप्रतिष्ठ साहित्यकार कृष्णबिहारी मिश्र से मिलकर अपने होटल लौट रहा हूं। वहीं हिंदी लेखक, पत्रकार और वर्धा के हिंदी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर कृपाशंकर चौबे से मुलाकात हो गई ...
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आज सारा देश ही 'शिवपालगंज' है

मंगलवार,अक्टूबर 31, 2017
नई दिल्ली। हमारे देश में व्यंग्य में उपन्यास लिखने की समृद्ध परम्परा नहीं रही है लेकिन जो थोड़े से उपन्यास व्यंग्य उपन्यास लिखे गए हैं, उनमें से एक 'रागदरबारी' को ज्यादातर लोगों ने पढ़ रखा होगा।
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परसाई के बहाने

गुरुवार,अगस्त 24, 2017
हिन्दी साहित्य के मशहूर व्यंग्यकार और लेखक हरिशंकर परसाई से आज कौन परिचित नहीं है और जो परिचित नहीं हैं, उन्हें परिचित होने की जरूरत है।
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हिन्दी पत्रकारिता के अमिट हस्ताक्षर और बहुमुखी प्रतिभा के धनी राजेन्द्र माथुर (रज्जू बाबू) की 7 अगस्त को जन्मतिथि है। रज्जू बाबू जैसा बहुमुखी प्रतिभा का एवं सदैव जाग्रत अनेकानेक जिज्ञासाओं का धनी, मात्र पत्रकारिता के क्षेत्र में ही नहीं अन्य ...
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नई दिल्ली। दिल्ली हिन्दी अकादमी की उपाध्यक्ष एवं सुप्रसिद्ध लेखिका मैत्रेयी पुष्पा को आज यहां उदयराज सिंह स्मृति सम्मान से विभूषित किया गया।
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राजनीति में विचारों के लिए सिकुड़ती जगह के बीच पं. दीनदयाल उपाध्याय का नाम एक ज्योतिपुंज की तरह सामने आता है। अब जबकि उनकी विचारों की सरकार पूर्ण बहुमत से दिल्ली की सत्ता में स्थान पा चुकी है, तब यह जानना जरूरी हो जाता है कि आखिर दीनदयाल उपाध्याय की ...
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युगदृष्टा साहित्यकार दिनकर ने अपने समय की कठिनाइयों को बड़ी पैनी दृष्टि से देखा व पहचाना। युवा आक्रोश तथा अनुशासनहीनता के लिए उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा-'अनुशासनहीनता वह रोग नहीं, जो कल पैदा हुआ और परसों खत्म हो जाएगा। जब तक शासन के कर्णधार नहीं ...
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यह बात आश्चर्यजनक है लेकिन सच है कि लेखन कभी उन्होंने घर में रहकर एयरकंडीशंड रूम में नहीं किया बल्कि विषय की आवश्यकता के अनुसार गरीब और सुदूर बस्तियों में जाकर रही। उनके बीच महीनों रहती थीं तब जाकर उनके उपन्यास की भावभूमि तैयार होती थी। उनके संघर्ष ...
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उदारीकरण की बयार का सबसे बड़ा हमला संस्कृति पर हुआ है..भारतीय समाज में तमाम ऊंच-नीच के बावजूद आत्मीयता की एक अजस्र धारा सदियों से बहती रही है...यह अजस्रता भारतीय संस्कृति की मूल रही है..उदारीकरण की बयार ने सबसे ज्यादा भारतीय आत्माओं की बीच शनै:-शनै: ...
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