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हिन्दी कविता : दो आंसू प्रजातंत्र के लिए...

शनिवार,दिसंबर 7, 2019
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अंततः मुबारक महाराष्ट्र को एक तिमुही सरकार। एक राजनीतिक मंडप जिसके हैं तीन मुख्य द्वार ||
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भोपाल गैस त्रासदी पर कविता- आर्तनाद, चीखें अंधे, बहरे चमड़ी उधड़े चेहरे लाखों मासूमों को जो आज भी
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स्कूल जाते बच्चों की मां, उठ जाती है बड़ा पछिलहरा में, कर देती है बच्चों का टिफिन तैयार , उन्हें नहा-धुला और दुलार कर बिठा देती हैं उन्हें बस रिक्शे और ठेले पर
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मैं लखनऊ स्टेशन से बाहर निकलता हूं सामने लिखा हुआ है कि ‘मुस्कुराइए कि आप लखनऊ में हैं’ भूल-भुलैया और इमामबाड़े से
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ये (नेता) क्या कभी बाज आएंगे अपनी शाश्वत घिनौनी फितरत से।
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वर्षा ने भर दिये ताल सब, नदियां हुईं लबालब। खेत हुए सरसब्ज सभी, उगेंगी सब फसलें अब
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दीपावली पर कविता- सूर्य का तेज, सूर्य की रोशनी, सूर्य का वजूद, दुनिया जानती है।
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निकल दिवाला गया पहिले से,अब आएगी दिवाली। चिंता से मन व्याकुल हो गया, खाली पड़ी है थाली। फरमाइश कैसे पूरी होगी,
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इस बार की दीपावली कुछ अधिक ही सुनहरी होगी। अनुगुंजित 370/राफेल / राममंदिर की सफलताओं की स्वर लहरी होगी ...
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सुरक्षा की आधुनिकतम युक्ति तुम। अचूक प्रहार की मारक शक्ति तुम। किसकी ताब है अब सके तुम्हारी मार झेल। स्वागतम् राफेल।।
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सहमी हुई थी यह जमीन सहमा था सारा आसमां जीवन के इस मोड़ पर छाई गहरी खामोशियां।।
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भगत सिंह का देश के प्रति प्रेम, दीवानगी और मर मिटने का भाव, उनके शेर-ओ-शायरी और कविताओं में साफ दिखाई देता है, जो आज भी युवाओं में आज भी जोश भरने का काम करता है।
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'उनका' संकल्प है कि भेजकर ही रहेंगे वे, हर भ्रष्टाचारी को जेल की सलाखों में।
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गूंजेगी भारत माता की जय अमेरिका के मंच से। दस गुना होगी भारी जो हर पाकिस्तानी प्रपंच से।। 370 से उभरी आत्मनिश्वासी हुंकारों से।
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हमेशा मानव सभ्यताओं का विकास नदियों के तट पर हुआ शायद नदी यह समझती थी कि उसके बलिदान के द्वारा
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चंद्रयान 2 पर कविता- भारत की इंजीनियरिंग तपस्या का प्रतीक हमारा चंद्रयान, जब यकायक ओझल हुआ संपर्क से अंतिम क्षणों में। देश हुआ स्तब्ध, उस आकस्मिक बाधा से निपट अनजान,
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डर-सा लगने लगा है एक चिंता लगी रहती है कि विलुप्त होते जा रहे हैं 'शब्द'
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चंद्रयान 2 का मिशन था जगत से काफी निराला, गर्व है 'इसरो' और 'सिवन' पर भले छिन गया निवाला।
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भाषा जब सहज बहती, संस्कृति, प्रकृति संग चलती। भाषा-सभ्यता की संपदा, सरल रहती अभिव्यक्ति सर्वदा।
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