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20 जनवरी को आ रही है सबसे खास एकादशी, जानें कैसे करें पूजन, महत्व एवं लाभ

शुक्रवार,जनवरी 17, 2020
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मां शारदा सुख, संपत्ति, विद्या, बुद्धि, यश, कीर्ति, पराक्रम, प्रतिभा और विलक्षण वाणी का आशीष प्रदान करती है। प्रस्तुत है आपकी राशि के अनुसार सरस्वती मंत्र-
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अगर आप मां सरस्वती के मंत्र और श्लोक नहीं जानते हैं तो वसंत पंचमी के दिन इन 11 नामों को 11 बार जपें। यश, विद्या, पराक्रम और बुद्धि के लिए बस यही 11 नाम पर्याप्त हैं। ये नाम असंभव को संभव बना देते हैं।
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वाणी, लेखनी, प्रेम, सौभाग्य, विद्या, कला, सृजन, संगीत और समस्त ऐश्वर्य को प्रदान करने वाली देवी मां सरस्वती से शुभ आशीष प्राप्त करने का दिन है वसंत (बसंत) पंचमी। मां शारदा के पूजन की सरलतम विधि है...
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वसंत पंचमी का शुभ और मंगलकारी पर्व इस बार दो दिन आ रहा है। 29 और 30 जनवरी को सरस्वती देवी की पूजा अर्चना की जाएगी। माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि में इस वर्ष 3 ग्रहों का स्वराशि योग निर्मित हो रहा है। मंगल वृश्चिक राशि पर, गुरु धन में और शनि ...
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चादर एवं तिल का दान करें तो शीघ्र ही हर मनोकामना पूरी हो सकती है। आइए जानें आपकी राशि के अनुसार कौन सा दान शुभ है....
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सूर्य संक्रांति में मकर सक्रांति का महत्व ही अधिक माना गया है। माघ माह में कृष्ण पंचमी को मकर सक्रांति देश के लगभग सभी राज्यों में अलग-अलग सांस्कृतिक रूपों में मनाई जाती है। आओ जानते हैं कि मकर संक्रांति के बारे में रोचक तथ्‍य।
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मकर संक्रांति के दिन नीचे दिए गए मंत्रों में से जो भी मंत्र आसानी से याद हो सकें उसके द्वारा सूर्य देव का पूजन-अर्चन करें। फिर अपनी मनोकामना मन ही मन बोलें।
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इस संक्रांति को परिधावी संवत्सर में माघ कृष्ण पंचमी रहेगी, योग शोभन और करण तैतिल रहेगा। सिंह राशि में चंद्र और कुंभ लग्न, मकर में सूर्य होंगे। कारण तैतिल है जिसे चर करण कहते हैं। इसका प्रतीक गधा है। इसे अशुभ फलदायी सुप्त अवस्था का करण माना जाता है। ...
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14 जनवरी को शाम 7.53 बजे सूर्य देव धनु से मकर राशि में प्रवेश करेंगे। चूंकि सूर्य का राशि परिवर्तन सूर्यास्त के बाद होगा। इसके चलते पुण्यकाल 15 जनवरी को सुबह श्रेष्ठ रहेगा।
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इस दिन सूर्य अपने पुत्र शनिदेव से नाराजगी त्यागकर उनके घर गए थे इसलिए इस दिन को सुख और समृद्धि का दिन भी माना जाता है।
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पिछले कुछ वर्षों से कुछ शहरों में पतंगबाजी के खेल में मांजे के उपयोग को बंद करने की मुहिम शुरू हुई है, परंतु उसका असर अभी क्षीण है। यह आवाज इसलिए उठी है कि आसानी से न दिखाई पड़ने वाले मांजे की चपेट में अनेक राहगीर व आकाश में विचरते पक्षी आ जाते हैं। ...
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दक्षिण भारत में 'पोंगल' का हार प्रतिवर्ष मकर संक्रांति के आसपास मनाया जाता है। यह उत्सव लगभग 4 दिन तक चलता है।
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नववर्ष 2020 में मकर-संक्रांति का पर्व 15 जनवरी को मनाया जाएगा। सूर्य के राशि परिवर्तन अर्थात गोचर को शास्त्रानुसार संक्रांति कहा जाता है। सूर्य का यह गोचर प्रतिमाह होता है, जब गोचरवश सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं तब मकर संक्रांति का पर्व मनाया ...
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मकर संक्राति आते ही आसमान में उड़ती हुई रंग बिरंगी पतंग भी नजर आने लगती है। संक्रांति पर देश में गुजरात में पतंग उड़ाने का सबसे बड़ा आयोजन होता है,
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खिचड़ी की गर्मी व्यक्ति को मंगल और सूर्य से जोड़ती है। इस प्रकार खिचड़ी खाने से सभी प्रमुख ग्रह मजबूत हो जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन नए अन्न की खिचड़ी खाने से शरीर पूरा साल आरोग्य रहता है।
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पंपापुर से हनुमानजी को बुलवाया गया था, तब हनुमानजी बालरूप में थे। जब वे आए, तब 'मकर संक्रांति' का पर्व था। श्रीराम भाइयों और मित्र मंडली के साथ वे पतंग उड़ाने लगे। कहा गया है कि वह पतंग उड़ते हुए देवलोक तक जा पहुंची।
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सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में संक्रमण करने को संक्रांति कहते हैं। वर्ष में 12 संक्रांतियां होती है जिसमें से 4 संक्रांति मेष, तुला, कर्क और मकर संक्रांति ही प्रमुख मानी गई हैं। मकर संक्रांति के दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है ...
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शास्त्रों में सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए मकर संक्रांति का दिन सबसे उत्तम माना गया है। मकर संक्रांति के दिन गेहूं और गुड़ गाय को खिलाने या किसी ब्राह्मण को दान देने से पुण्य की प्राप्ति होती है साथ ही सूर्य मजबूत होता है।
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सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में संक्रमण करने को संक्रांति कहते हैं। वर्ष में 12 संक्रांतियां होती है जिसमें से 4 संक्रांति ही महत्वपूर्ण हैं जिनमें मेष, तुला, कर्क और मकर संक्रांति प्रमुख हैं। मकर संक्रांति के दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में ...
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