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दुर्भिक्ष, चोरी, मिरगी आदि का निवारण करने हेतु

बुधवार,जनवरी 1, 2020
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सर्व ज्वर नाशक है यह पाठ

बुधवार,जनवरी 1, 2020
सुगंधित जल बिंदुओं और मंद सुगंधित वायु के साथ गिरने वाले श्रेष्ठ मनोहर मंदार, सुंदर, नमेरु,
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गंभीर और उच्च शब्द से दिशाओं को गुंजायमान करने वाला, तीन लोक के जीवों को शुभ विभूति प्राप्त कराने में समर्थ और समीचीन जैन धर्म के स्वामी की जय घोषणा करने वाला
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गर्व रक्षक पाठ

बुधवार,जनवरी 1, 2020
हे प्रभो! तीनों लोकों के कांतिमान पदार्थों की प्रभा को तिरस्कृत करती हुई आपके मनोहर भामंडल की विशाल कांति एक साथ उगते हुए
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21 दिसंबर को जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ का जन्म व दीक्षा कल्याणक महोत्सव मनाया जाएगा। आइए जानें...
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Jain Chalisa : भगवान पार्श्वनाथ चालीसा

शुक्रवार,दिसंबर 20, 2019
Jain Chalisa- शीश नवा अरिहंत को, सिद्धन करूं प्रणाम। उपाध्याय आचार्य का ले सुखकारी नाम। सर्व साधु और सरस्वती, जिन मंदिर सुखकार। अहिच्छत्र और पार्श्व को, मन मंदिर में धार।|
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अयोध्या हिन्दू, जैन और बौद्ध धर्म का संयुक्त तीर्थ स्थल है। अयोध्या जितनी हिन्दुओं के लिए पवित्र नगरी है उतनी ही जैन धर्म के अनुयायियों के लिए भी पवित्र नगरी है।
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दीपावली की कार्तिक कृष्ण अमावस्या-30 के दिन 527 ईसापूर्व जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर को 72 वर्ष की आयु में पावापुरी उद्यान (बिहार) में निर्वाण प्राप्त हुआ था। कहते हैं कि उस दिन मंगलवार था। इसी दिन भगवान महावीर के प्रमुख गणधर गौतम स्वामी ...
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भगवान महावीर जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर होकर अंतिम तीर्थंकर हैं। महावीर स्वामी ने कार्तिक कृष्ण अमावस्या के दिन ही स्वाति नक्षत्र में कैवल्य ज्ञान प्राप्त करके निर्वाण प्राप्त किया था।
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जैन समुदाय में रोहिणी व्रत का बहुत महत्‍वपूर्ण स्‍थान है। इस बार यह व्रत 18 अक्टूबर मनाया जा रहा है। 27 नक्षत्रों में शामिल रोहिणी नक्षत्र के दिन यह व्रत होता है, इसी वजह से इसे रोहिणी व्रत कहा जाता है। रोहिणी व्रत का जैन समुदाय में खास महत्‍व है। ...
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संत शिरोमणि आचार्यश्री विद्यासागरजी महापुरुष मानव जाति के प्रकाश पुंज हैं, जो मनुष्‍य को धर्म की प्रेरणा देकर उनके जीवन के अंधेरे को दूर करके उन्हें मोक्ष का मार्ग दिखाने का महान कार्य करते हैं।
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राष्ट्रसंत आचार्य श्री विद्यासागरजी ने राजस्थान की ऐतिहासिक नगरी अजमेर में आषाढ़ सुदी पंचमी विक्रम संवत्‌ 2025 को लगभग 22 वर्ष की आयु में संयम-धर्म के परिपालन हेतु उन्होंने पिच्छी कमंडल धारण करके मुनि दीक्षा धारण की थी।
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आज दिगंबर जैन समुदाय का क्षमावाणी पर्व है। जैन धर्म की परंपरा के अनुसार वर्षा ऋतु में मनाया जाने वाला पर्युषण पर्व, जैन धर्मावलंबियों में आत्मशुद्धि का
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दसलक्षण पर्व के दिनों में किया गया त्याग और उपासना हमें जीवन की सच्ची राह दिखाते हैं। क्षमा शब्द मानवीय जीवन की आधारशिला है। जिसके जीवन में क्षमा है, वही महानता को प्राप्त कर सकता है।
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दसलक्षण पर्व के इन दन दिनों में कोई एकासन कर रहा है, तो किसी ने उपवास का संकल्प लिया है। सुबह जल्दी उठकर घर के सारे कामों को पूरा करके मंदिर जाना और फिर दिन भर विभिन्न आयोजनों में व्यस्त रहना।
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ऋषि पंचमी से दिगंबर जैन समाज के दशलक्षण महापर्व शुरू हो गए है। इस पर्व के अंतर्गत 8 सितंबर 2019, रविवार को सुगंध दशमी पर धूप खेवन का पर्व मनाया जाएगा।
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भारतीय वाङ्मय की कतिपय धाराएं सर्वज्ञ एवं सर्वज्ञता के धरातल पर अपना अस्तित्‍व बनाकर रखती हैं। सर्वज्ञ की अवस्‍था जीवात्‍मा की सर्वोत्‍कृष्‍ट अवस्‍था है। चरम एवं परम स्थिति है। सामान्‍य भाषा में चैतन्‍यता के प्रकर्षता को सर्वज्ञता कहा जाता है।
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पर्युषण पर्व जैन धर्म का सर्वाधिक महत्वपूर्ण पर्व है। यह पर्व बुरे कर्मों का नाश करके हमें सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। जैन धर्म के दो प्रमुख संप्रदाय श्वेतांबर और दिगंबर परंपरा से यह पर्व अलग अलग तरीके से मनाते हैं। हालांकि ...
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3 सितंबर 2019, मंगलवार से दिगंबर जैन समाज में पर्वों के राजा कहे जाने वाले महापर्व पर्युषण शुरू हो गए हैं। यह आने वाले 10 दिन सभी के जीवन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है,
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पर्युषण पर्व पर क्षमावाणी का कार्यक्रम ऐसा है जिससे जैनेतर जनता को काफी प्रेरणा मिलती है। इसे सामूहिक रूप से विश्व-मैत्री दिवस के रूप में मनाया जा सकता है।
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