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हिन्दी कविता : स्कूल जाते बच्चों की मां

शनिवार,नवंबर 30, 2019
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खाली नहीं बैठना हमको, कुछ न कुछ करते रहना है। गरमी की छुट्टी में रम्मू, प्यारे-प्यारे चित्र बनाता। उन्हें बेचकर मजे-मजे से, रुपए रोज कमाकर लाता। इन रुपयों से निर्धन बच्चों, की उसको सेवा करना है।
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पप्पू सोया देखा सपना, जो सोचा वह हो जाने दो। नियमों में कर दो फेरबदल, बच्चा सरकार बनाने दो।
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लाल बहादुर शास्त्री पर कविता- जीवन के सूखे मरुथल में, झेले ये झंझावात कई। जितनी बाधा, कंटक आते, उनसे वे पाते, शक्ति नई।
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झाड़ू लेकर साफ-सफाई, कर दी अपने कमरे की। टेबिल कंचन-सी चमकाई। कुर्सी की सब धूल उड़ाई। पोंछ-पांछ के फिर से रख दी, चीजें पढ़ने-लिखने की।
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बापू जैसा बनूंगा मैं, राह सत्य की चलूंगा मैं। बम से बंदूकों से नहीं, बापू जैसा लडूंगा मैं।
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पेंट शर्ट और जूते पहने, पहुंच गई वह शाला। पर टीचर मैडम को उसने, पसोपेश में डाला।
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इस महान भारत की संस्कृति का यह गौरव गान है। न्याय-नीति का पालक अपना प्यारा हिन्दुस्तान है।। जहां सृष्टि निर्माण हुआ था वर्ष करोड़ों पहले,
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सुबह आठ बजने तक, दूध नहीं आया है। चाय नहीं बिस्तर में,
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हिन्दी कविता : एक सवाल

बुधवार,जुलाई 31, 2019
कक्षा सातवीं के उस अपरिपक्व मन को पढ़ाया गया आज इतिहास। यह बताया गया...भारत था 'सोने की चिड़िया'।
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चंद्रशेखर आजाद पर हिन्दी कविता- तुम आजाद थे, आजाद हो, आजाद रहोगे, भारत की जवानियों के तुम खून में बहोगे।
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गुरु के दोहे आज भी पथप्रदर्शक के रूप में प्रासंगिक है। गुरु द्वारा बताए रास्ते पर चलकर हम जीवन का कल्याण कर सकते हैं। यहां पर पाठकों के लिए प्रस्तुत हैं गुरु की महिमा का वर्णन करते कुछ चुनिंदा दोहे :-
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गुरु बिना ज्ञान कहां, उसके ज्ञान का आदि न अंत यहां। गुरु ने दी शिक्षा जहां, उठी शिष्टाचार की मूरत वहां।
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मां बोलीं सूरज से बेटे, हुई सुबह तुम अब तक सोए। देख रही हूं कई दिनों से, रहते हो तुम खोए-खोए।
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नहीं हुआ है ज्यादा अरसा, अभी खुला है नया मदरसा। हिन्दी, उर्दू, अंग्रेजी भी, केजी वन है, केजी टू भी। इसके आगे पहला दर्जा।
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गेहूं सिंह ने चना चंद के, कान पकड़कर खींचे। धक्का खाकर चना चंदजी, गिरे धम्म से नीचे।
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अरी जरीना, कह री मीना। देख हमारी क्यारी में यह, भीना-भीना, हरा पुदीना। देख-देख यह, कैसा छितरा।
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बाघ आ गया बाघ आ गया, कहकर चरवाहा चिल्लाया। आए गांव के लोग वहां तो,
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अच्छे लगते हैं पापा, जब मुस्काते हैं। अच्छे लगते हैं जब वे, गुन-गुन गाते हैं।
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बाल वीर या पोगो ही, देखूंगी, गुड़िया रोई। चंदा मामा तुम्हें आजकल, नहीं पूछता कोई।
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