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शिक्षा का बाजारवाद भारत के लिए खतरनाक..!

रविवार,जनवरी 19, 2020
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कहानी में इस कदर की सिरहन सिर्फ सआदत हसन मंटो ही पैदा कर सकते थे। दरअसल, अपने आसपास की स्‍थितियों की वजह से मंटो लेखक बने थे।
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सिर्फ इच्छा करने मात्र से ही हमें सफलता नहीं मिलती बल्कि सफलता पाने के लिए अपने भीतर आत्मविश्वास को जगाना होता है और साथ ही दृढ़ संकल्पित होने की भी आवश्यकता होती है। दृढ़ संकल्प में अद्भुत शक्ति होती है, जिसकी मदद से हम अपने जीवन में न सिर्फ सफलता ...
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29 नवंबर 2010 को जब ‘रोलिंग इन द डीप’ रीलिज हुआ तो बिलबोर्ड-100 और बिलबोर्ड-200 के चार्टबस्टर्ड में यह सॉन्ग टॉप पर था। ‘समवन लाइक यू’ भी सारे बेडरूम और बार में बजता था।
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पुलिस को कठघरे में खड़ा करने वाले कुछ भी कहें, लेकिन उसने यही कहा कि यह छात्रों का मामला है, इसलिए हम तत्काल गिरफ्तार नहीं रहे, उन्हें नोटिस भेजकर जवाब मांगा गया है
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मैं एक सुबह उठकर निकल पड़ता हूं कार्यालय के लिए दौड़कर मेट्रो को पकड़ता हूं
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इस बार संजय राउत ने इंदिरा गांधी और मुंबई के कुख्‍यात डॉन करीम लाला की मुलाकात को लेकर बयान दिया है। इस पर विवाद शुरू हो गया है, आगे विवाद बढ़ेगा भी। ट्विटर पर हैशटैग राउत_एक्‍सपोज्‍ड_इंदिरागांधी टॉप ट्रेंड है।
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कि देखो, फागुन भी टोह ले रहा और खेतों की मेड़ पर उग आईं हैं टेसू चटकाती सुर्ख होती डालियां तो किसी शीत भरी पर गुनगुनी शाम की तरह गुज़र जाओ इस गली अंजुली भर गरमाहट लेकर आभासों के मेरे सूरज मन की मकर राशि में छा जाओ देव ...
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लियोनार्ड नॉरमेन कोहेन 30 के दशक में पैदा होने वाला यहूदी था। जवानी में कोहेन कनेडियन कवि इरविंग लेटन के इंप्रेशन में था, लेकिन वह अपने प्रिय कवि फ़ेदरिको गार्सिया लोर्का की तरह पोएट बनना चाहता था।
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वह पहली छत के दरवाजे की चौखट थामे मांगती रही सदा उसके हिस्से का आकाश उड़ाने के लिए अपनी पतंग! फकत मांगने से, नहीं मिला कभी उसे उसके हिस्से का आकाश और उड़ा न सकी वह आज तक अपनी कोई पतंग ! उस दूसरी ने कभी नहीं मांगा आकाश का कोना बस ...
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पिछले कुछ वर्षों से कुछ शहरों में पतंगबाजी के खेल में मांजे के उपयोग को बंद करने की मुहिम शुरू हुई है, परंतु उसका असर अभी क्षीण है। यह आवाज इसलिए उठी है कि आसानी से न दिखाई पड़ने वाले मांजे की चपेट में अनेक राहगीर व आकाश में विचरते पक्षी आ जाते हैं। ...
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मकर संक्राति आते ही आसमान में उड़ती हुई रंग बिरंगी पतंग भी नजर आने लगती है। संक्रांति पर देश में गुजरात में पतंग उड़ाने का सबसे बड़ा आयोजन होता है,
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विश्वविद्यालय परिसर में भारी संख्या में नकाबपोश लाठी-डंडों, हॉकी स्टिक आदि लेकर छात्रों, शिक्षकों पर हमला कर दें, छात्रावासों में तोड़फोड़ करें, हिंसा करें और फिर आराम से भाग जाएं। यह सब कल्पना से परे है।
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5 जनवरी 2020 को वामा साहित्य मंच ने अपने स्थापना के 3 वर्ष पूर्ण किए और चौथा स्थापना दिवस मनाया। इस अवसर पर दिनांक 11 जनवरी 2020 को आयोजित समारोह में नवीन अध्यक्ष, सचिव और कार्यकारिणी का शपथ ग्रहण कार्यक्रम संपन्न हुआ।
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आई खिचारहाई कहीं देश के एक कोने में कहते लोग इसे खिचारहाई, कहीं कहते मकर संक्रांति तो कहीं पतंगबाजी के लिए होती इसमें बेटियों की पहुनाई (मेहमाननवाजी)।
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स्‍वामी जी के जीवन से जुड़ी 10 खास बातों में से आज हम आपको बताएंगे वो बातें जो उनके आध्‍यात्‍मिक जीवन में बेहद महत्‍वपूर्ण हैं।
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स्वामी विवेकादंन के बारे में भारत के युवा कितना जानते हैं? शायद बहुत कम या शायद बहुत ज्यादा? आओ जानते हैं 8 पॉइंट में उनके बारे में कुछ खास।
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स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी सन्‌ 1863 को कोलकाता में हुआ। उनका घर का नाम नरेंद्र दत्त था। उन्होंने देश और विदेश में वेदांत और सच्चे मार्ग का प्रसार प्रसार किया। मात्र 39 वर्ष की उम्र में 4 जुलाई 1902 को उनका निधन हो गया। आओ जानते हैं उनके ...
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2 जनवरी को स्वामी विवेकानंद की जयंती है। धर्म और दर्शन पर स्‍वामी जी ने बहुत सारी किताबें लिखी हैं, लेकिन स्‍वामी जी की 10 ऐसी पंक्‍तियां हैं जो युवाओं में ऊर्जा का संचार कर देगी।
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स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी सन्‌ 1863 को हुआ था। उनके पिता विश्वनाथ दत्त पाश्चात्य सभ्यता में विश्वास रखते थे। उनका घर का नाम नरेंद्र दत्त था।
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