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* यह जलजनित रोग है। संक्रामक जल लेने से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में यह आसानी से पहुँच जाता है।

* प्रोटोजोन, एंट-अमीबा हिस्टोलाइटिका, बड़ी आँत को अपना घर बनाता है।

लक्षण : पतले दस्त, परिवर्तित पाखाने की आदत, भोजन पश्चात दस्त, पेट में दर्द, जो रुक-रुक कर हो, कब्ज एवं दस्त बारी-बारी से हों, अपच वायु-विकार हो।

* भोजन निर्माण एवं संग्रहण से संबंधित समस्त तत्व शुद्धता तथा कीट से बचाव पर केंद्रित होते हैं। विशेष रूप से होटल, ठेले आदि पर अशुद्ध पानी से बने चटखारेदार खाद्य पदार्थ, वेटर द्वारा नाखून, सिर एवं शरीर के अन्य खुले भाग का ध्यान नहीं रखे जाने के कारण अमीबियासिस काजीवाणु एक से दूसरे तक पहुँचता है।

* यह एक कोशीय जीवाणु बड़ी आँत के अतिरिक्त लीवर, फेफड़ों, हृदय, मस्तिष्क, वृक्क, अंडकोष, अंडाशय, त्वचा आदि तक में पाया जा सकता है।

उपचार : चिकित्सक की सलाह से दवाएँ लें। दूषित जल के संपर्क से त्वचा संबंधी रोग भी हो जाते हैं। जहाँ तक संभव हो सड़क पर बहते पानी में नंगे पाँव निकलने की कोशिश न करें। पेयजल में क्लोरिवेट दवा डालें।
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