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इरफान
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इरफान खान का बचपन
मैं अपने पड़ोस में और चौगान स्टेडियम में जाकर क्रिकेट खेलने में खूब रुचि लेता था और बड़ा होकर क्रिकेटर ही बनना चाहता था। क्रिकेट में मेरी प्रैक्टिस भी खूब अच्छी थी और सीके नायडू ट्रॉफी के लिए मेरा सिलेक्शन भी लगभग हो गया था। पर जब घर पर सभी को यह बात मालूम हुई तो उन्होंने इसके लिए इजाजत नहीं दी ...
कविता
ND
अगला जनम भी लूँ मैं तुम्हारा ही बेटा बनकर
देख जाओ बाबूजी अपने बेटे का पुरुषार्थ तुम्हारे आदर्श को किया मैंने चरितार्थ। उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने का लिया मैंने संकल्प, यही तो था तुम्हारे जीवन का निहितार्थ।। बाई ने तो इस धरती पर हँसना मुझे सिखाया, तुमने मुझको जीवन में संघर्ष का पाठ पढ़ाया। तुम ही मेरी शक्ति थे और हौसला थे मेरा, तुमने ही जीवन का असली मकसद समझाया।। जानकर मेरी अभिरुचि को दे दी सही दिशा, जब भी गलत कदम उठा तो दिखाया मुझे शीशा। साधन की शुचिता पर तुमने दिया हमेशा जोर, दिशा-दर्शक सदा रही थी जीवन में भगवत् गीता।। दो-दो नौकरी करके तुमने हम सबको पाला, हमको खुश रहने की खातिर अपना सुख टाला। झूठी शान और झूठे मान के पीछे कभी न भागे, 'सादा जीवन-उच्च विचार' को जीवन में ढाला।। तुम्हारे पदचिह्नों पर चलने का है किया जतन, मेरे जीवन के आभूषण सत्य, ईमान और लगन। चादर जितने पैर पसारे, उड़ा नहीं हवाओं में, मेरे जीवन के साक्षी हैं धरती और गगन।। बाबूजी यह पाती भेजूँ बतलाओ किस देस में, तुमको ढूँढूँ कहाँ-किधर मैं आखिर हो किस वेष में। कुछ पल बस सपनों का दामन ही सहला जाओ, पीड़ा के बस अर्थ बचे हैं जीवन के अवशेष में।
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कहानी
ND
एक बच्चा कैसे खुश हुआ
माँ बत्तख आश्चर्य से सोच रही थी कि क्या मुझसे अंडों को गिनने में कोई गलती हो गई? पर माँ बत्तख और ज्यादा कुछ सोचती इससे पहले सातवें अंडे से एक बच्चा बाहर निकल आया। यह सातवाँ बच्चा बाकी छः बच्चों से अलग था। भूरे पंख और आँखों पर पीलापन। बाकी छः नन्हे बत्तख बच्चों के बीच यह बड़ा अजीब लग रहा था।
• और हमारी दोस्ती हो गई • अपनी भाषा का महत्व
• दया का अधिकार • सर्दी की वो शाम
• एक भला आदमी • खुशी हमारे मन में होती है