| | | | | | हनुमान चालीसा तत्व विवेचन | | सफल और सार्थक जीवन की परिकल्पना भगवद्भक्ति से ही साकार हो सकती है। यही वह दिव्य प्रभा है, जो भौतिक सुख की अभिलिप्सा और अज्ञान रूपी अंधकार में आकंठ डुबी मानव देह की यथार्थ से साक्षात्कार कराती है .... | | | | | |
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| |  | | ND | | | | साथ-साथ उड़ सकते थे | | मैंने तुम्हारे लिए छोड़ी थोड़ी पृथ्वी
तुमने मेरे लिए छोड़ दिया थोड़ा आकाश
हम दोनो ने मिल कर
एक-दूसरे के लिए पर्याप्त जगह बनाई ... | | | | | |
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| | | | पिल्ला सड़क पार कर चुका था | | वह नए साल का पहला दिन था जब मैं ऑफिस से घर लौट रहा था। सब लोग घरों को लौटने की हड़बड़ी में थे। एक तेज रफ्तार से सबको पछाड़ देने की बेचैनी में। लगता था जैसे जो पीछे रह गया, वह हमेशा पीछे ही रह जाएगा। हमेशा पिछड़ा .... | | | | |
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