मुख पृष्ठ >  विविध >  उर्दू साहित्‍य
नज़्म
Rahi
Aziz Ansari WD
 
नज़्म---'निसार करूँ'
हसीन फूलों की रानाइयाँ निसार करूँ------------------ सितारे चाँद कभी, कहकशाँ निसार करूँ -------------- बहार पेश करूँ गुलसिताँ निसार करूँ ---------- ---- जहाने-हुस्न की रंगीनियाँ निसार करूँ...
आगे पढें...  
नई शायरी
रेहबर इन्दौरी
बेकल उत्साही की ग़ज़ल
आप से बात करेंगे कभी तन्हाई में
मुनव्वर राना की ग़ज़लें
त्रिमोहन की ग़ज़लें
राहत इन्दौरी की ग़ज़लें
कामिल बेहज़ादी-भोपाल
कौसर सिद्दीक़ी की ग़ज़लें
 
और भी
आज का शेर
WD
 
उसके करम की बात न पूछो, साथ वो सब के होले है
उसके करम की बात न पूछो, साथ वो सब के होले है------------------ इक दरवाज़ा बन्द अगर हो, सौ दरवाज़े खोले है...
आगे पढें...  
वेबदुनिया में और भी
ND
 
ग़ालिब की ग़ज़ल (अशआर के मतलब के साथ)
यार की आदत, दोज़ख़ की दहकती हुई आग की तरह है। मुझे यार की इस गर्म-मिज़ाजी में ही राहत मिलती है। और चूंके दोज़ख़ की आग भी उसके गर्म मिज़ाज की तरह है इसलिए मुझे उसमें भी राहत मिलेगी।
अशआर : (मजरूह सुलतानपुरी)
रुपायन इन्दौरी के क़तआत
शकील बदायूनी
रुबाइयाँ : मेहबूब राही
'अज़ीज़ अंसारी की ग़ज़ल'
सिकन्दर हमीद इरफ़ान की शायरी