आज तक आपने तितलियों को फूलों और कलियों के ऊपर मँडराते देखा होगा। फूलों का रस चूसने आई हैं या अठखेलियाँ कर रही हैं यहाँ तक तो जरूर इस पर विचार किया होगा लेकिन अज़ीज़ अंसारी का इसी चीज़ को देखने का नजरिया देखिए : कलियाँ जब भी उदास होती हैं, उनकी अफ़सुरदगी मिटाने को, तितलियाँ सदा आसपास होती हैं ...
डूबने वाला था, और साहिल पे चेहरों का हुजूम .................................................................................. .................
पल की मौहलत थी, मैं किसको आँख भरकर देखता - अहमद फ़राज़
प्रेम किसी एक व्यक्ति से हमारे संबंधों का नाम नहीं है, यह एक दृष्टिकोण है, एक चारित्रिक रुझान है जो किसी व्यक्ति के साथ-साथ पूरी दुनिया से हमारे संबंधों को अभिव्यक्त करता है। वह केवल एक लक्ष्य और उसके साथ के संबंधों का नाम नहीं है।