आलेख | योगासन
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मन को शांत करे भ्रामरी
भ्रामरी प्राणायाम करते समय भ्रमर अर्थात भँवरे जैसी गुंजन होती है, इसी कारण इसे भ्रामरी प्राणायाम कहते हैं। भ्रामरी प्राणायाम से जहाँ मन शांत होता है वहीं इसके नियमित अभ्यास से और भी बहुत से लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं। सुखासन, सिद्धासन या पद्मासन में बैठकर सर्वप्रथम दोनों होथों की अँगुलियों में से अनामिका अँगुली से नाक के दोनों छिद्रों को हल्का सा दबाकर रखें। तर्जनी को कपाल पर, मध्यमा को आँखों पर, सबसे छोटी अँगुली को होठ पर और अँगुठे से...
• ब्रह्म मुद्रा के लाभ • क्या घुटनों में दर्द है?
• वायु से बढ़ाएँ आयु • कब्ज है रोग की जड़
• दिमागी द्वंद्व से बचाव का उपाय • प्यार भरे सेक्स की शर्त
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पादहस्तासन 
इस आसन में हम दोनों हाथों से अपने पैर के अँगूठे को पकड़ते हैं, पैर के टखने भी पकड़े जाते हैं। चूँकि हाथों से पैरों को पकड़कर यह आसन किया जाता है इसलिए इसे पादहस्तासन कहा जाता है। यह आसन खड़े होकर किया जाता है। यह आसन मूत्र-प्रणाली, गर्भाशय तथा जननेन्द्रिय स्रावों के लिए विशेष रूप से अच्‍छा होता है। इससे कब्ज की शिकायत भी दूर होती है।
प्लाविनी और अग्निसार
शहरी भोजन और जीवन शैली के चलते ज्यादातर लोग अपच रोग से परेशान रहते हैं। हमारे पूरे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए पाचन तंत्र का स्वस्थ और मजबूत होना आवश्यक है। पाचन तंत्र सुदृड़ है...
वजन घटाओ, उम्र बढ़ाओ
यदि आप मोटे या तोंदू है तो वजन घटाना कोई मुश्किल कार्य नहीं बशर्ते की हम सोच लें कि घटाना ही है। व्यक्ति एक अति से दूसरी अति पर जाने लगता है। वजन घटाने के लिए कुछ लोग कड़े उपवास...
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उज्जायी क्रिया और प्राणायाम
योग में उज्जायी क्रिया और प्राणायाम के माध्यम से बहुत से गंभीर रोगों से बचा जा सकता है बशर्तें की उक्त प्राणायाम और क्रिया को किसी योग्य योग शिक्षक से सीखकर नियमित की जाए।