आलेख | योगासन
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हमारा शरीर फाइव लेयर्स से बना है। योग से सभी लेयर दुरुस्त रहती है। दूसरे तरीके का कोई भी व्यायाम सिर्फ बॉडी लेयर पर काम करता है। बॉडी, माइंड और सोल के बीच संतुलन कायम करता है योग। माइंड सभी के मध्य में है इसीलिए इसका महत्व बड़ जाता है।

हमारे सारे कार्य इस तीन पॉउंड की खोपड़ी से ही होते हैं। एक कदम आगे बढ़ाना होतो पहले इसकी सूचना ब्रेन में जाती है फिर कदम आगे बढ़ता है। ब्रेन की जटिल संरचना को समझना कोई आसान काम नहीं है। सच तो यह है कि इतने रिसर्च के बाद भी साइंटिस्ट इसे पूरी तरह आज तक नहीं समझ पाए हैं। ब्रेन में सौ करोड़ से भी अधिक विशेष प्रकार की धागेनुमा कोशिकाएँ है। सच तो ये है कि हमारा ब्रेन तो कंप्यूटर से करोड़ों गुना तेज है, लेकिन....

साइंटिस्ट कहते हैं कि हमारे ब्रेन का सिर्फ 15 से 20 प्रतिशत हिस्सा ही सक्रिय रह पाता है। कारण यह कि सामान्यतौर पर हम जो साँस लेते हैं उसके माध्यम से हमारे 20 प्रतिशत वायुकोष ही सक्रिय हो पाते हैं जबकि ब्रेन, फेफड़ों और हृदय के करोड़ों वायुकोषों तक साँस द्वारा प्राणवायु नहीं पहुँच पाने के कारण वे निढाल से ही पड़े रहते हैं। उनका कोई उपयोग नहीं हो पाता।

इस सबसे कहीं ज्यादा भयावह बात यह है कि टेंशन, डिप्रेशन, व्यसन या क्रोध हमारे ब्रेन को बहुत ज्यादा डेमेज़ करता है। कई कोशिकाएँ या न्युरॉन निष्‍क्रिय होकर मरने के ‍इंतजार में पड़े रहते हैं। इस सबका रिजल्ट यह निकलता है कि हम जीवन भर कंफ्यूरहते हैं। डिसिजन पॉवर खतम हो जाती है। कॉन्फिडेंट का लेवल कम होने लगता है और व्यक्ति वक्त के पहले ही एंड्रोपॉज का शिकार हो जाता है।

प्राणायाम को प्रणाम : दोनों स्वर अर्थात नाक के भाग से साँस ब्रेन के दोनों भागों में पहुँचती है, जिससे ब्रेन में प्राणवायु का संचार होता है। प्राणायाम द्वारा प्राणवायु मिलने से ब्रेन की सभी कोशिकाएँ और न्युरॉन सक्रिय होकर ब्रेन की शक्ति को बढ़ाते हैं। नए रक्त का निर्माण होता है और सभी नाड़ियाँ हरकत में आने लगती हैं। छोटे-छोटे नए टिश्यू बनने लगते हैं प्राणायाम से ब्रेन के दोनों भाग समान रूप से उन्नत होते हैं। प्राणायाम में अनुलोम-विरोम, सूर्यभेदि प्राणायाम, भ्रामरी प्राणायाम एवं उज्जयी प्राणायाम मस्तिष्क के विकास में अत्यधिक मदद करते हैं।

ध्यान पर ध्यान दें : ध्यान से मस्तिष्क के दोनों भाग का संपूर्ण विकास होकर तनाव निर्माण करने वाले हार्मोंस कम बनते हैं और खुशी देने वाले हार्मोन्स का अधिक निर्माण होने से ब्रेन में जन्मी क्रियाशीलता से व्यक्ति चिंता के बजाय चिंतन पर ध्यान देने लगता है। समस्याओं का हल चुटकी में निकलता है। समझने की शक्ति और कार्य करने की इच्छा बढ़ने लगती है। शर्त यह है कि ध्यान में नींद नहीं लेना, किसी भी प्रकार की हलचन नहीं करना। क्रिया और प्रतिक्रिया से अलग सिर्फ आवाजों को सुनना, चाहे वह धड़कन की आवाज हो या साँसों की आवाज हो।

माइंड कॉन्सनट्रेशन तकनीक : भृकुटी (आई ब्रो के बीच) पर ध्यान लगाकर निरंतर मध्य स्थित अँधेरे को देखते रहें और यह भी जानते रहें कि साँस अंदर और बाहर ‍हो रही है। यह योग की त्राटक विधि का एक हिस्सा मात्र है। इस विधि को करने से ब्रेन वन डॉयमेंशिअली होता है, जिससे मेमोरी और ‍विजन पॉवर बढ़ती है।

आसनों से आसान होती राह : कटिचक्रासन, त्रिकोणासन, हनुमानासन, गरूड़ासन, पादांगुष्ठासन, मयूरासन, अर्धशलभासन, जानुशिरासन, अर्धमत्स्येन्द्रासन, मरिचयासन, सूर्य नमस्कार, एकपाद उस्थितासन, एकपाद मूगदलासन, पर्वतासन, संतुलित मार्जरासन, एकपाद प्रसरणासन शीर्षासन, पादहस्तासन और चक्रासन। यह सभी ब्रेन को मजबूत और तरोताजा बनाए रखने के साथ ही उसकी कार्य क्षमता और प्रणाली में भी सुधार करते हैं। कंप्यूटर के सामने घंटों बैठकर काम करने वाले लोगों को पश्चिमोतासन और भुजंग आसान करना चाहिए। इससे गर्दन और पीठ दर्द की शिकायत ठीक होती है।
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