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मुंबई का वो डॉन जिसने दाऊद इब्राहिम की भी पिटाई कर दी थी!

गुरुवार,जनवरी 16, 2020
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लियोनार्ड नॉरमेन कोहेन 30 के दशक में पैदा होने वाला यहूदी था। जवानी में कोहेन कनेडियन कवि इरविंग लेटन के इंप्रेशन में था, लेकिन वह अपने प्रिय कवि फ़ेदरिको गार्सिया लोर्का की तरह पोएट बनना चाहता था।
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पिछले कुछ वर्षों से कुछ शहरों में पतंगबाजी के खेल में मांजे के उपयोग को बंद करने की मुहिम शुरू हुई है, परंतु उसका असर अभी क्षीण है। यह आवाज इसलिए उठी है कि आसानी से न दिखाई पड़ने वाले मांजे की चपेट में अनेक राहगीर व आकाश में विचरते पक्षी आ जाते हैं। ...
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मकर संक्राति आते ही आसमान में उड़ती हुई रंग बिरंगी पतंग भी नजर आने लगती है। संक्रांति पर देश में गुजरात में पतंग उड़ाने का सबसे बड़ा आयोजन होता है,
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विश्वविद्यालय परिसर में भारी संख्या में नकाबपोश लाठी-डंडों, हॉकी स्टिक आदि लेकर छात्रों, शिक्षकों पर हमला कर दें, छात्रावासों में तोड़फोड़ करें, हिंसा करें और फिर आराम से भाग जाएं। यह सब कल्पना से परे है।
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25 दिसंबर 2016 को जब ज़्यादातर लोग चर्च में मोमबत्तियाँ जला रहे थे, ठीक उस रोज़ ही जॉर्ज माइकल के कॅफ़िन को बर्फ़ धीमे-धीमे ढँक रही थी। यही वह दिन था जब उसका ‘लास्ट क्रिसमस’ कई दिलों में गूँज रहा था। यह इत्तेफ़ाक़ ही था कि ‘लास्ट क्रिसमस’ गाने वाला जॉर्ज ...
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अभिनेत्री दीपिका पादुकोण के जेएनयू में जाने के बाद एक बार फिर से जेएनयू बहस के केंद्र में है, कोई इसे पब्‍लिसिटी स्‍टंट कह रहा है तो कोई फिल्‍म प्रमोशन का तरीका। दीपिका के इस कदम के बाद सोशल मीडिया पर उनकी आलोचना हो रही है। हालांकि बॉलीवुड में ही ...
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पहला विश्व हिन्दी सम्मेलन 10 जनवरी 1975 को नागपुर में आयोजित हुआ लेकिन आधिकारिक तौर पर हर वर्ष मनाए जाने की घोषणा में 31 साल लग गए, जो बेमानी रहा।
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जनरल कासिम सुलेमानी वो शख्‍स है जिसकी मौत के बाद दुनिया पर युद्ध का खतरा मंडरा रहा है, और ईरान में सुलेमानी के जनाजे में जो अवाम उमड़ी है, उससे लगता है कि ईरान युद्ध के पूरे मूड़ में है। हाल ही में इराक की राजधानी बगदाद में अमेरिका के हमले में जनरल ...
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जेएनयू को आमतौर पर वामपंथ (Left Politics) का गढ़ माना जाता है, पिछले कई दिनों से फीस को लेकर, बोलने की आजादी को लेकर और विचारधारा की लड़ाई को लेकर जेएनयू खबरों में है, रविवार की रात में हुई मारपीट को लेकर यह एक बार फिर से चर्चा में है, लेकिन जानना ...
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सरकार द्वारा चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) के पद पर जनरल विपीन रावत की नियुक्ति से भारत के रक्षा क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत हुई है।
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यह 4 नवंबर 1979 की बात है। ईरान में अमेरिकी दुतावास पर एक हमला होता है और करीब 66 लोगों को बंधक बना लिया जाता है। बाद में इनमें से कुछ लोगों को रिहा कर दिया जाता है, लेकिन 52 लोगों को तेहरान की अमेरिकी दुतावास में ही बंधक बना लिया जाता है, इन 52 ...
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पिछले कुछ साल भारत की आधी आबादी को डराने कोसने और उसके दमन करने की नीतियों को न्यायसंगत ठहराने में निकल गया है।
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वर्ष 2019 को किस खास बात के लिए याद किया जाएगा या इस वर्ष की कौन-सी ऐसी बात है जिसकी यादें भारतीय इतिहास में दर्ज हो जाएंगी? यह सवाल जब आज से कुछ सालों के बाद पूछा जाएगा तो जो लोग इस देश से, देश के संविधान से, इस देश की विविधताओं से, इस देश की आजादी ...
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वर्ष 2019 अपने अंतिम पड़ाव पर है, अपने अंतिम शेष दिनों को गिनते हुए। यह समय है, इस वर्ष की प्रमुख घटनाओं के पुनरावलोकन का। ये वे घटनाए हैं जिनका आगामी वर्षों पर प्रभाव पड़ेगा। सबसे पहले संसार के उन प्रमुख देशों की बात करते हैं, जहां पदासीन ...
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देश की नदियों को परस्पर जोड़कर जल की शक्ति को भविष्य के सशक्त भारत के निर्माण में लगाने का सपना देखने वाले भविष्यद्रष्टा, पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटलबिहारी वाजपेयीजी के चरणों में प्रणाम। आप युगों-युगों तक राष्ट्र उत्थान के लिए हम सबको सतत प्रेरित ...
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दुनिया में सबसे ज्यादा इंटरनेट भारत में बंद किए जाते हैं– तानाशाह देशों से भी ज्यादा। नागरिकता कानून की आड़ में भारत में इंटरनेट लगातार बाधित हो रहा है और यह काम सरकार के आदेश पर हो रहा है। इंटरनेट सेवाएं क्यों बंद की जाती हैं – कानून व्यवस्था बनाने ...
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आज हम बात करते हैं उन प्रसिद्ध भारतीय तकनीकी विशेषज्ञों की विशेषकर सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की, जिन्होंने स्वयं अपने ही दम पर आसमान छू लिया और विश्व में भारत को सम्मान दिलाया। जेहन में जो सबसे पहला नाम आता है वह है सुंदर पिचाई का, जिन्हें हाल ही में ...
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विचार हमारा शत्रु है यह विचार करते हुए अराजक विचारों के बक्से से कुछ बिखरा हुआ यहां प्रस्तुत है... हेडिंग में जब यह लिखा जा रहा है कि भारत का उपद्रवी युवा तो इसका मतलब यह कि यहां सिर्फ उपद्रवी युवाओं की ही बात की जा रही है। इस लेख में गुमराह शब्द ...
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चारों तरफ आग ही आग है। कहीं बसें जल रही हैं तो कहीं पुलिस चौकी राख है। जिन सड़कों से चलकर मासूम बच्चे स्कूल जाते हैं, वे धू-धू करती आग से तप गई हैं। बसें जलकर कालिख में तब्दील हो गई हैं। ऑटो वाले कहीं जाने को तैयार नहीं। यही दृश्य अगर देश की आजादी ...
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