नागरिकता संशोधन बिल : राज्यसभा में मोदी-शाह की अग्निपरीक्षा आज,नंबर गेम में सरकार आगे

Author विकास सिंह| Last Updated: बुधवार, 11 दिसंबर 2019 (08:23 IST)
नागरिकता संशोधन बिल आज राज्यसभा में पेश किया जाएगा। लोकसभा में आसानी से बिल पास कराने वाली मोदी सरकार की असली अग्निपरीक्षा राज्यसभा में होगी। नागरिकता संशोधन बिल पर राज्यसभा में दोपहर 2 बजे बहस शुरु होने की संभावना है। राज्यसभा में बिल पर बहस के लिए सभापति ने 6 घंटे का समय तय रखा है।
राज्यसभा में क्या मोदी सरकार नागरिकता संशोधन बिल को पास करवा पाएगी आज यह सबसे बड़ा सवाल बन गया है। राज्यसभा में बिल को रोकने के लिए पूरा विपक्ष अब एकजुट होकर पूरी तरह लामबंद हो चुका है। राज्यसभा में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने अपने सांसदों को उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी कर दिया है। इसके साथ ही आज पार्टी देश के सभी राज्यों में नागरिकता संशोधन बिल के विरोध में आंदोलन करने जा रही है।

वहीं लोकसभा में बिल पर सरकार का समर्थन करने वाली शिवसेना ने अब यूटर्न ले लिया है। शिवसेना ने राज्यसभा में बिल के समर्थन के बदले भाजपा के सामने कुछ शर्ते रख दी है। वहीं एनडीए की प्रमुख सहयोगी दल जेडीयू में बिल के समर्थन को लेकर बड़ी दरार पड़ गई है। ऐसे में अब इन दोनों दलों का राज्यसभा में क्या रुख होगा इस पर सबकी निगाहें लग गई है।
राज्यसभा का सियासी समीकरण – राज्यसभा के सियासी समीकरण के बात करें तो वर्तमान में राज्यसभा में सदस्यों की संख्या 240 है और सरकार को बिल पास करवाने के लिए 121 मतों की जरुरत है। जिसमें NDA को अपने सहयोगी दलों के साथ 106 सदस्यों का बहुमत हासिल है। जिसमें बीजेपी के 83 ,जेडीयू के 6, अकाली के 3, आरपीआई के 01 और अन्य 13 है।

सरकार के पक्ष में नंबर गेम - लोकसभा में नागरिकता संशोधन बिल पर सरकार के समर्थन में खड़ी होने वाली AIADMK के 11, बीजेडी के 7 ,वाईएसआर के 2, टीडीपी के 2 और अन्य 3 छोटे दलों के एक -एक सदस्यों का समर्थन मिलने की संभावना है।

अगर राज्यसभा में कोई बड़ा उलटफेर नहीं हुआ तो संख्या गणित के मुताबिक एनडीए के 106 सदस्यों के साथ ही उसको छोटे दलों के 25 अन्य सदस्यों का समर्थन मिल सकता है जो सदन की कुल सदस्य संख्या के बहुमत 121 से पूरे 10 अंक आगे है। ऐसे में नंबर गेम में सरकार फिलहाल आगे दिखाई दे रही है।

राज्यसभा में विपक्ष की ताकत – अगर राज्यसभा में विपक्ष के ताकत की बात करें तो कांग्रेस के नेतृत्व में यूपीए में शामिल दलों के सदस्यों की संख्या 62 पहुंचती है। जिसमें कांग्रेस के 46,आरजेडी के 4,एनसीपी के 4, डीएमके के 5 और अन्य 03 शामिल है। इसके साथ ही बिल का विरोध करने वाले क्षेत्रीय दलों में टीएमसी के 13, एसपी के 9,टीआरएस के 6, सीपीएम के 5,बीएसपी के 4, आप के 3,पीडीपी के 2, सीपीआई के 1 और जेडीएस के 1 सदस्य का समर्थन हासिल है।

अगर यूपीए के 62 और क्षेत्रीय दलों के 44 सदस्यों को जोड़ दिया जाए तो विरोध में आंकड़ा 106 पहुंच जाता है। इसके साथ अगर शिवसेना भी राज्यसभा में बिल का विरोध करती है तो उसके 3 सदस्य भी विरोध में वोट डालेंगे तो आंकड़ा 109 पहुंच पाता है। अगर विपक्ष को राज्यसभा में बिल को रोकना है तो उसे सत्ता पक्ष में बड़ी सेंध लगाना होगी जो वर्तमान सियासी हालत में मुश्किल दिख रहा है।

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