पाकिस्तानी विशेष लोक अभियोजक ने कहा है कि मुंबई हमले में शामिल रहने के आरोपी लश्कर-ए-तैयबा के ऑपरेशन कमांडर जकीउर रहमान लखवी समेत सात आरोपियों का बचाव कर रहे वकील अदालत में याचिकाएँ दायर कर उनके खिलाफ मुकदमे की सुनवाई में अनावश्यक रूप से बाधाएँ खड़ी कर रहे हैं।
मुंबई हमले के संदिग्धों के खिलाफ मुकदमे में सरकार की ओर से नियुक्त विशेष लोक अभियोजक मलिक रब नवाज नून ने कहा कि जहाँ इन याचिकाओं को पहले ही अदालत खारिज कर चुकी है, समय बर्बाद किया जा रहा है। लखवी के वकील ख्वाजा सुल्तान सुनवाई की नई तारीख हासिल करने के लिए याचिकाएँ दायर करते रहते हैं और वह अनावश्यक बाधाएँ खड़ी कर रहे हैं।
नून ने कहा कि रावलपिंडी की आतंकवाद निरोधक अदालत को मामले पर फैसला करने में कम से कम एक साल लग सकता है लेकिन यह सिर्फ तभी हो सकता है जब बचाव पक्ष के वकील और पुलिस कार्रवाई में सहयोग करें।
नून ने हेराल्ड पत्रिका से कहा कि अगर सब कुछ ठीक रहा और अगर बचाव पक्ष के वकील, गवाह और पुलिस सबने सहयोग किया तो मामले पर फैसला करने में अदालत को कम से कम एक साल लगेगा। हालाँकि कुछ वकीलों ने कहा कि नियमित मुकदमे में भी गवाहों का बयान दर्ज करने और साक्ष्यों का मूल्यांकन करने में काफी वक्त लगता है।
उन्होंने कहा कि मुंबई मामले में गवाहों को सुनने और साक्ष्य दर्ज करने में तीन साल तक वक्त लग सकता है। उच्चतम न्यायालय के वकील अफशाँ गजनफर ने कहा कि यह मायने नहीं रखता कि मुकदमा कितना महत्वपूर्ण है, जब तक कि अदालत सारी औपचारिकताएँ पूरी नहीं कर लेती तब तक किसी के खिलाफ फैसला नहीं सुना सकती।
सात संदिग्धों के खिलाफ मुकदमा सुरक्षा कारणों से अदियाला जेल में चल रहा है। मुकदमा विवादों से घिरा रहा है और पिछले साल से इसमें विलंब होता रहा है। (भाषा)