सेना के इतिहास में पहली बार लेफ्टिनेंट जनरल रैंक के एक अधिकारी के खिलाफ 2005 के राशन घोटाले में लिप्तता को लेकर कोर्ट मार्शल की कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं।
इस घोटाले की आरंभिक जाँच में लेफ्टिनेंट जनरल एसके साहनी को प्रथम दृष्टया लिप्त पाया गया है। यह घोटाला उस समय का है जब ले. जन. साहनी सेना की आपूर्ति कोर में थे। वे अब अवकाश ग्रहण कर चुके हैं।
आपूर्ति कोर में घटिया दाल की खरीदारी में अनियमितता पाए जाने के कारण सेना ने अदालती जाँच के आदेश दिए थे।
सेना के सूत्रों ने बताया कि जनरल ऑफिसर के खिलाफ कोर्ट मार्शल का आदेश ले. जन. तेजकुमार सप्रू ने दिया। इसके मुताबिक कोर्ट मार्शल की प्रक्रिया 24 नवम्बर से जालंधर में शुरू होने की संभावना है।
कोर्ट मार्शल की अध्यक्षता ले. जनरल जेएस लिड्डर करेंगे और उनकी अगुवाई में सात सदस्यीय कोर्ट मार्शल पीठ गठित की गई है। इसमें ले. जनरल पीडी सामंत के अलावा पाँच मेजर जनरल शामिल हैं।
इस कोर्ट मार्शल के लिए ब्रिगेडियर नवनीत खन्ना को जज एडवोकेट जनरल नियुक्त किया गया है।
सूत्रों के मुताबिक जाँच अदालत ने ले. जनरल को राशन की खरीद में अनियमितता के मामले में आरंभिक तौर पर दोषी पाया है और उनके खिलाफ कोर्ट मार्शल की प्रक्रिया शुरू किए जाने के पर्याप्त सबूत पाए गए हैं।
सूत्रों ने कहा कि ले. जन. साहनी के खिलाफ राशन घोटाले में अनेक आरोप सही पाए गए हैं। इनके अनुसार साहनी ने न सिर्फ घटिया दाल खरीदी, बल्कि इसकी आपूर्ति दूर के डिपो में कराने के बजाए नजदीक ही कराने का इंतजाम कराया, ताकि ठेकेदार को परिवहन में लाखों रुपए का फायदा हो सके। |