चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने कहा कि चुनावों में काले धन की भूमिका, माओवादियों की ओर से मतदाताओं को खतरा, राजनीतिक दलों की बेतहाशा वृद्धि और शहरी मतदाताओं का उपेक्षापूर्ण रवैया देश की चुनावी प्रक्रिया में बाधक हैं।
कुरैशी ने 2009 के आम चुनावों पर शुक्रवार रात यहाँ आयोजित एक संगोष्ठी में कहा कि काले धन की भूमिका सबसे बड़ी समस्या है। हम यह स्वीकार करते हैं कि इस पर काबू पाने में हम असफल रहे हैं। तीस दिनों की चुनावी प्रक्रिया में हम इस पर रोक नहीं लगा सकते।
उन्होंने माओवादियों की घातक क्षमता और वोट डालने से मतदाताओं को रोकने का भी उल्लेख किया। कुरैशी ने देश में कुकुरमुत्ते की तरह फैल रहे राजनीतिक दलों पर भी चिंता जताई और कहा कि फिलहाल 1200 के करीब छोटे राजनीतिक दल हैं और इनमें से कुछ तो पान की दुकान से चल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि चुनाव के प्रति शहरी मतदाताओं का उपेक्षापूर्ण रवैया एक घातक ट्रेंड है। अगर मतदाता सरकार के गठन में कोई हिस्सा नहीं लेते तो उन्हें किसी सरकार की आलोचना करने का कोई अधिकार नहीं।
चुनाव आयुक्त ने हाल के लोकसभा चुनाव में कम हिंसा पर संतोष जताया और कहा कि बूथ कब्जा अब गुजरे जमाने की बात हो गई है। |