बेंगलुरु (भाषा), शनिवार, 26 सितंबर 2009( 00:18 IST )
चंद्रयान प्रथम द्वारा चंद्रमा पर पानी की खोज से इसरो के वैज्ञानिक वर्ष 2013 में चंद्रयान द्वितीय के साथ अपने प्रयोगों को आगे बढ़ाने पर नए सिरे से विचार करने लगे हैं।
इसरो की कक्षा में कई प्रकार के प्रयोगों के अलावा चंद्रयान द्वितीय परियोजना के तहत चंद्रमा की सतह पर दो रोवर भेजने की योजना है।
इसरो के अध्यक्ष जी. माधवन नायर ने कहा कि चंद्रयान प्रथम की खोज के बाद हमें इसके लक्ष्यों में कुछ मध्यावधि सुधार करने होंगे। हमें इसमें कुछ फेरबदल करना होगा। इस मसले पर जोरशोर से विचार विमर्श जारी है। नायर ने संकेत दिया कि वैज्ञानिक चंद्रमा के रोवर में कुछ इस प्रकार के उपकरण लगाने की संभावनाओं को तलाश रहे हैं, जो चंद्रमा की सतह को खोद सकें और वहाँ प्रयोग कर सकें।
उन्होंने बताया कि चंद्रयान द्वितीय के लगभग सभी प्रयोग भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा किए जाएँगे, लेकिन चंद्रमा की सतह पर जाने वाला लूनर रोवर रूस से हासिल किया जाएगा।
इसरो भी चंद्रमा की सतह पर रोवर का छोटा स्वदेशी संस्करण भेजने के उपायों पर विचार कर रहा है। नायर ने बताया कि इस समय चंद्रयान द्वितीय का काम पूरा हो चुका है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक यह पता लगाने में जुटे हैं कि वे किस प्रकार अतिरिक्त पे-लोड समायोजित कर सकते हैं।