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प्रदोष व्रत : 12 सरल जानकारियां आपके काम की हैं

मंगलवार,फ़रवरी 18, 2020
Pradosh
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पौराणिक शास्त्रों में प्रदोष व्रत की बड़ी महिमा है। इस दिन भगवान शिव जी की विधिपूर्वक आराधना करने से सभी संकटों से मुक्ति मिलती है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। आइए जानें कैसे करें पूजन :-
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ग्यारस अर्थात ग्यारह तिथि को एकादशी और तेरस या त्रयोदशी तिथि को प्रदोष कहा जाता है। प्रत्येक शुक्ल और कृष्ण पक्ष में यह दोनों ही तिथियां दो बार आती है। हिन्दू धर्म में एकादशी को विष्णु से तो प्रदोष को शिव से जोड़ा गया है।
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प्रदोष माह में दो बार यानी शुक्ल एवं कृष्ण पक्ष की बारस अथवा तेरस को आता है। प्रदोष का व्रत एवं उपवास भगवान सदाशिव को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। प्रदोष काल में स्नान करके मौन रहना चाहिए, क्योंकि शिवकर्म सदैव मौन रहकर ही पूर्णता को प्राप्त ...
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दोष-व्रत को श्रद्धा व भक्तिपूर्वक करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। आज हम वेबदुनिया के पाठकों को प्रदोष-व्रत की पूर्ण जानकारी देंगे।
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समाज-सुधारक स्वामी दयानंद सरस्वती का जन्म मोरबी के पास काठियावाड़ क्षेत्र जिला राजकोट, गुजरात में 12 फरवरी सन् 1824 में हुआ। तिथि के अनुसार फल्गुन मास की कृष्ण दशमी के दिन उनका जन्म हुआ था। मूल नक्षत्र में जन्म होने के कारण उनका नाम मूलशंकर रखा गया ...
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23 फरवरी के दिन धन की देवी मां लक्ष्मी जी को प्रसन्न करने के लिए शाम के समय घर के ईशान कोण में गाय के घी का दीपक लगाएं। बत्ती में रूई के स्थान पर लाल रंग के धागे का उपयोग करें। प्रस्तु‍त हैं फाल्गुन अमावस्या के 2 सरल उपाय...
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साल में 12 अमावस्या होती हैं। इस दिन 108 बार तुलसी की परिक्रमा करने से मन को शांति की अनुभूति होती है। जो लोग आध्यात्मिक मार्ग पर बढ़ना चाहते हैं उनके लिए भी यह दिन अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। आइए जानें साल भर की 12 अमावस कब कब आ रही हैं...
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यह अमावस्या सुख, संपत्ति और सौभाग्य की प्राप्ति के लिए विशेष फलदायी है। जीवन में सुख और शांति के लिए फाल्गुन अमावस्या का व्रत रखा जाता है।
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23 फरवरी 2020 रविवार, को फाल्गुन अमावस्या है। इस अमावस्या का शास्त्रों में अत्यधिक महत्व बताया गया है। हिन्दू धर्म-संस्कृति में आस्था रखने वालों के लिए वैसे तो प्रत्येक मास की
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राम जब सीता को रावण के पास से छुड़वाकर अयोध्या ले आए तो उनके राज्याभिषेक के कुछ समय बाद मंत्रियों और दुर्मुख नामक एक गुप्तचर के मुंह से राम ने जाना कि प्रजाजन सीता की पवित्रता के विषय में संदिग्ध है अत: सीता और राम को लेकर अनेक मनमानी बातें बनाई जा ...
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देवी सीता मिथिला के राजा जनक की ज्येष्ठ पुत्री थीं इसलिए उन्हें 'जानकी' भी कहा जाता है। कहते हैं कि राजा जनक को माता सीता एक खेत से मिली थी। इसीलिए उन्हें धरती पुत्री भी कहा जाता है। लक्ष्मण, भारत और शत्रुघ्न की पत्नियां माता सीता की बहनें थीं।
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उसी समय ब्रह्माजी वहां आए और भगवान से कहने लगे- 'रघुनंदन! इसे तो मैंने स्त्री के हाथों मरने का वरदान दिया है। आपका प्रयास बेकार ही जाएगा।
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Janki Jayanti पर जानकी स्तोत्र का पाठ नियमित करने से मनुष्य के सभी कष्टों का नाश होता है। इसके पाठ से माता सीता प्रसन्न होकर धन-ऐश्वर्य की प्राप्ति कराती है।
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देवी सीता मिथिला के राजा जनक की ज्येष्ठ पुत्री थीं इसलिए उन्हें 'जानकी' भी कहा जाता है। वाल्मीकि रामायण के अनुसार एक बार मिथिला में पड़े भयंकर सूखे से राजा जनक बेहद परेशान हो गए थे, तब इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए उन्हें एक ऋषि ने यज्ञ करने और ...
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जैसे श्रीराम को पुरुषों में उत्तम पुरुषोत्तम कहा गया है, उसी तरह माता सीता भी महिलाओं में सबसे उत्तम हैं। माता सीता का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। आओ जानते हैं उनकी मृत्यु का रहस्य।
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संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत करने से घर-परिवार में आ रही विपदा दूर होती है, कई दिनों से रुके मांगलिक कार्य संपन्न होते है तथा भगवान श्री गणेश असीम सुखों की प्राप्ति कराते हैं।
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बुधवार, 12 फरवरी 2020 को संकष्टी चतुर्थी है। यह एक बेहद खास तिथि है। इस दिन गणपतिजी की उपासना करने का विधान है। बुधवार का दिन श्री गणेश का दिन माना गया है
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देशभर में कई तरह के मेलों का आयोजन होता है। जैसे कुंभ मेला, माघी मेला, राजिम मेला, सूरजकुंड मेला आदि। इसी तरह से सोनकुंड मेले का आयोजन भी होता है। यह मेला माघी पूर्णिमा के अवसर पर छत्तीसगढ़ में आयोजित होता है। सोनकुंड में निरंतर 80 वर्ष से माघी ...
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हर साल माघ पूर्णिमा को संत रविदास की जयंती मनाई जाती है। माघ मास की पूर्णिमा को जब रविदास जी ने जन्म लिया वह रविवार का दिन था जिसके कारण इनका नाम रविदास रखा गया।
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