रात्रि के उत्तरार्द्ध में में वे अपने शरीर पर जलती हुई बातियों से मालिश करते हैं। तत्पश्चात वह 'चेंदा' नामक ड्रम की धुन पर नृत्य करते हुए ये बातियाँ फिराते हैं। धीरे-धीरे ड्रम की गति के साथ-साथ उनके कदम भी तेज हो जाते हैं। करीब एक घंटे तक चलने वाली इस परंपरा में यह बहुत आश्चर्यजनक लगता है कि इतनी देर तक...
क्या पत्थर की सात किलो वजनी प्रतिमा पानी पर तैर सकती है?.. क्या प्रतिमा के तैरने या न तैरने से आने वाले अच्छे या बुरे समय का पता लगाया जा सकता है? आइए चलते है आस्था या अंधविश्वास की इस बार की कड़ी में इन्हीं प्रश्नों के उत्तर खोजने...
आस्था और अंधविश्वास की इस बार की कड़ी में हम आपको लेकर चलते हैं माँ कवलका के चमत्कारिक मंदिर जो महू-नीमच मार्ग पर रतलाम शहर से लगभग 32 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस मंदिर का चमत्कार यह है कि यहाँ पर स्थित मूर्ति मदिरापान करती है।