दिल्ली से सटे हरियाणा का बहादुरगढ़ इलाके का कसार गाँव पिछले कुछ वर्षों से धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में चर्चित हो रहा है। यहाँ स्थित वेदमाता गायत्री शक्तिपीठ के दर्शन के लिए देश-विदेश से भारी संख्या में श्रद्धालु आ रहे हैं। इसके निर्माण में सभी धर्मों के लोगों ने अपनी भूमिका निभाई है। यहाँ दान देने की अनुमति नहीं है।
मंदिर संचालकों का कहना है कि यह भारत का पहला ऐसा मंदिर है जिसका गुंबद श्रीयंत्र का बना है। यहाँ श्रीराम की जन्मकुंडली बनाई गई है। इसमें राशि और ग्रहों के अनुरूप दुर्लभ पौधे लगाए गए हैं। वेदमाता श्रीगायत्री शक्तिपीठ के पीठाधीश्वर एवं ज्योतिषाचार्य पं. हुकमचंद मुदगिल ने बताया कि गायत्री मंत्र को विश्व के कोने-कोने तक पहुँचाने के उद्देश्य से इसकी स्थापना की गई है।
शक्तिपीठ में गायत्री मंत्र का निरंतर जाप चलता रहता है। यह शक्तिपीठ वास्तुकला की दृष्टि से अद्भुत है। इसके निर्माण में राजस्थान और दक्षिण भारतीय वास्तुकारों की सेवाएँ ली गई हैं। शक्तिपीठ संचालक मंडल के अध्यक्ष राहुल देव मुदगिल का कहना है कि निकट भविष्य में शक्तिपीठ इंग्लैंड, कनाडासहित अनेक देशों में विस्तार करने जा रहा है।
ND
यह शक्तिपीठ ज्योतिष, कर्मकांड और वास्तुशास्त्र जैसे विषयों के अनुसंधान को लेकर भी अग्रणी है। संस्कार भारती ज्योतिष विज्ञान अनुसंधान केंद्र के मुख्यालय के रूप में शक्तिपीठ का उद्देश्य विभिन्न संबंधित विषयों पर शोध करना है। अनेक वरिष्ठ सेवानिवृत्त अधिकारी अनुसंधान में जुटे हैं।
विख्यात ज्योतिषाचार्य केएन राव के शिष्य पं. हुकमचंद मुदगिल के नेतृत्व में ज्योतिष विज्ञान पर अनुसंधान कार्य चल रहा है। सर्वधर्म समाभाव का संदेश देता यह गायत्री शक्तिपीठ आगे चलकर बहुत बड़ा पर्यटन स्थल बन सकता है।