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दत्तात्रेय जयंती 2019 : 11 दिसंबर को भगवान दत्तात्रेय का अवतरण दिवस, पढ़ें सती अनुसूया की अनोखी कथा

मंगलवार,दिसंबर 10, 2019
दत्तात्रेय जयंती
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विवाह पंचमी इस वर्ष 2019 में 1 दिसंबर को मनाया जाएगा। विवाह पंचमी उत्सव के तौर पर मनाया जाता है। यह दिन बहुत खास है, इस दिन भगवान राम और सीता का विवाह हुआ था। आइए पढ़ें कथा, विवाह पंचमी के दिन कथा पढ़ने, सुनने व सुनाने से वैवाहिक जीवन सुखमय ...
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पौराणिक कथा के मुताबिक तारकासुर नाम का एक राक्षस था। उसके तीन पुत्र थे - तारकक्ष, कमलाक्ष और विद्युन्माली...भगवान शिव के बड़े पुत्र कार्तिकेय ने तारकासुर का वध किया।
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वैकुंठ चतुर्दशी की पुराणों में प्रमुख रूप से ये 3 कथाएं मिलती हैं , जिनके बारे में कहा जाता है कि इन्हें वैकुंठ चतुर्दशी के दिन पढ़ने से 14000 पाप कर्मों का दोष मिट जाता है। वेबदुनिया पाठकों के लिए तीनों कथा यहां प्रस्तुत हैं।
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शिवजी ने उनकी भक्ति की परीक्षा के उद्देश्य से एक कमल पुष्प कम कर दिया। भगवान श्रीहरि को पूजन की पूर्ति के लिए एक हज़ार कमल पुष्प चढ़ाने थे। एक पुष्प की कमी...
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भगवान विष्णु के वरदान से राजा दंभ के यहां एक पुत्र में जन्म लिया। इस पुत्र का नाम शंखचूड़ रखा गया। बड़ा होकर शंखचूड़ ने ब्रह्मा जी को प्रसन्न करने के लिए पुष्कर में घोर तपस्या की।
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भगवान विष्णु ने वृंदा का पतिव्रता धर्म भंग करने का निश्चय किया। उन्होंने जलंधर का रूप धर कर छल से वृंदा का स्पर्श किया। वृंदा का पति जलंधर, देवताओं से प राक्रम से युद्ध कर रहा था...
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भगवान श्री गणेश को तुलसी नहीं चढ़ती और तुलसी विवाह में गणेश नहीं रखे जाते। इसके पीछे पुराणों में एक रोचक कथा मिलती है। एक समय में धर्मात्मज नाम के राजा हुआ करते उनकी कन्या तुलसी यौवनावस्था में थी। अपने विवाह की इच्छा लेकर तुलसी तीर्थ यात्रा पर निकल ...
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वह तुलसी की बड़ी सेवा करती थी। पर भाभी को यह सब फूटी आंख नहीं सुहाता था। कभी-कभी तो वह गुस्से में कहती कि जब तेरा विवाह होगा तो तुलसी ही खाने को दूंगी तथा तुलसी ही तेरे दहेज में दूंगी।
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कथा के अनुसार एक बार जगद्गुरु आदि शंकराचार्य भिक्षा मांगने एक कुटिया के सामने रुके। वहां एक बूढ़ी औरत रहती थी, जो अत्यंत गरीबी और दयनीय स्थिति में थी।
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एक राजा था, उसका प्रण था वह रोज सवा मन आंवले दान करके ही खाना खाता था। इससे उसका नाम आंवलया राजा पड़ गया।
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धनतेरस से जुड़ी एक कथा है कि कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन देवताओं के कार्य में बाधा डालने के कारण भगवान विष्णु ने असुरों के गुरु शुक्राचार्य की एक आंख फोड़ दी थी। कथा के अनुसार...
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सामाजिक मान्यताओं के चलते भौमासुर द्वारा बंधक बनकर रखी गई इन नारियों को कोई भी अपनाने को तैयार नहीं था, तब अंत में श्रीकृष्ण ने सभी को आश्रय दिया।
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एक समय भगवान विष्णु मृत्युलोक में विचरण करने के लिए आ रहे थे तब लक्ष्मी जी ने भी उनसे साथ चलने का आग्रह किया। तब विष्णु जी ने कहा कि यदि मैं जो बात कहूं तुम अगर वैसा ही मानो तो फिर चलो। तब लक्ष्मी जी उनकी बात मान गईं और भगवान विष्णु के साथ भूमंडल पर ...
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धन तेरस पर यमरा जो दीपदान किया जाता है या कहें कि उनके निमित्त घर के चारों ओर दीप जलाकर उनकी पूजा की जाती है। आखिर धर तेरस पर यमराज की पूजा क्यों की जाती है? इसके पीछे दो कथाएं प्रचलित हैं।
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प्राचीन काल में एक साहूकार था, जिसके सात बेटे और सात बहुएं थी। इस साहूकार की एक बेटी भी थी जो दीपावली में ससुराल से मायके आई थी। दीपावली पर घर को लीपने के लिए सातों बहुएं मिट्टी लाने जंगल में गई तो ननद भी उनके साथ चली गई।
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शिव के दूसरे पुत्र कार्तिकेय को सुब्रमण्यम, मुरुगन और स्कंद भी कहा जाता है। उनके जन्म की कथा भी विचित्र है। कार्तिकेय की पूजा मुख्यत: दक्षिण भारत में होती है
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शरद पूर्णिमा को कोजागिरी पूर्णिमा व्रत और रास पूर्णिमा भी कहा जाता है तथा कुछ क्षेत्रों में इस व्रत को कौमुदी व्रत भी कहा जाता है। इस मौके पर आइए जानते हैं पौराणिक एवं प्रचलित कथा...
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रावण एक प्रकांड विद्वान था। वेद-शास्त्रों पर उसकी अच्छी पकड़ थी और वह भगवान भोलेशंकर का अनन्य भक्त था। उसे तंत्र, मंत्र, सिद्धियों तथा कई गूढ़ विद्याओं का ज्ञान था। ज्योतिष विद्या में भी उसे महारथ हासिल थी।
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इस देवी का वाहन सिंह है और इन्हें कुम्हड़े की बलि प्रिय है। संस्कृति में कुम्हड़े को कुष्मांड कहते हैं इसलिए इस देवी को कूष्मांडा। इस देवी का वास सूर्यमंडल के भीतर लोक में है।
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