यह कितना दुर्भाग्यपू्र्ण है कि तमाम प्रादेशिक, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सरकारी और गैर मानवाधिकार संगठनों के बावजूद मानवाधिकारों का परिदृश्य तमाम तरह की विसंगतियों और विद्रूपताओं से भरा पड़ा है। एक थाने में किसी आरोपी से पुलिस का व्यवहार हो, जेल में जेल प्रशासन या फिर युद्धबंदियों के साथ सरकारों का व्यवहार, हालात खौफनाक है।
हाल ही में विश्व परिदृश्य पर ही नजर...