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क्या इस मंदिर के दरवाजे खुद-ब-खुद खुलते और बंद होते हैं? जानिए 5 रहस्य

गुरुवार,दिसंबर 5, 2019
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अमावस्या माह में एक बार ही आती है। मतलब यह कि वर्ष में 12 अमावस्याएं होती हैं। प्रमुख अमावस्याएं : सोमवती अमावस्या, भौमवती अमावस्या, मौनी अमावस्या, शनि अमावस्या, हरियाली अमावस्या, दिवाली अमावस्या, सर्वपितृ अमावस्या आदि मुख्‍य अमावस्या होती है।
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भारत के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है विश्‍व प्रसिद्ध सबरीमाला का मंदिर। यहां हर दिन लाखों लोग दर्शन करने के लिए आते हैं। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर लगा प्रतिबंध हटा दिया है। करीब सैंकड़ों साल पुराने इस मंदिर ...
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केदारनाथ में 16 जून 2013 को एक भीषण बाढ़ आई थी। जून में बारी बारिश के दौरान वहां बादल फटे थे और कहते हैं कि केदारनाथ मंदिर से 5 किलोमीटर ऊपर चौराबाड़ी ग्लेशियर के पास एक झील बन गई थी जिसके टूटने से उसका सारा पानी तेजी से नीचे आ गया था। यह बिल्कुल जल ...
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भारत में गाय को पूज्जनीय माना जाता है। गाय के संबंध में दुनिया के प्रसिद्ध और महान लोग क्या कहते हैं आओ एक नजर इस पर डालते हैं।
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चौंसठ कलाओं में से एक चित्रकला का एक अंग है अल्पना। इसे ही मांडना भी कहते हैं और इसी का एक रूप है रंगोली। भारत में मांडना विशेषतौर पर होली, दीपावली, नवदुर्गा उत्सव, महाशिवरात्रि और संजा पर्व पर बनाया जाता है।
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नवदुर्गा के सभी रूप माता पार्वती से जुड़े हैं। माता पार्वती के इन रूप में उनका संपूर्ण जीवन और चरित्र समाया हुआ है। माता पार्वती को दुर्गा के समान माना जाता है इसीलिए उन्हें अम्बा और दुर्गा भी कहा जाता है। वैसे तो उनके इन नौ रूपों के देशभर में कई ...
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नारी में क्षमा, प्रेम, उदारता, लज्जा, विनय, समता, शांति, धीरता, वीरता, सेवा, सत्य, पर दुःख कातरता, शील, सद्भाव, सद्गुण और सौंदर्य इन सभी गुणों से युक्त नारी गरिमामयी बन पाती है। वर्तमान युग में महिलाएं हर मोर्चे पर अपनी योग्यता का प्रदर्शन कर सफलता ...
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नवदुर्गा के पवित्र पर्व के माध्यम से हमें दुनिया की प्रत्येक महिला के 9 रूपों का दर्शन होता है। प्रत्येक महिला खुद को 9 रूपों में व्यक्त करती ही है। जो महिला माता पार्वती के इन 9 रूपों के रहस्य को समझ लेती है, उसका जीवन सफल हुआ समझो।
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उपनिषद कहते हैं कि मृत्यु शरीर की होती है, आत्मा की नहीं। जिस आत्मा ने खुद को शरीर से अलग करके नहीं देखा, वही जन्म, मृत्यु और उसके बीच के जीवन के दुखद चक्र से गुजरता रहेगा। यह गीता का उपदेश है कि 'न कोई मरता है और न कोई मारता है तो फिर मौत से क्यों ...
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श्राद्ध में कौए या कौवे को छत पर जाकर अन्न जल देना बहुत ही पुण्य का कार्य है। माना जाता है कि हमारे पितृ कौए के रूप में आकर श्राद्ध का अन्न ग्रहण करते हैं। इस पक्ष में कौओं को भोजन कराना अर्थात अपने पितरों को भोजन कराना माना गया है। आओ जानते हैं कौए ...
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वैसे तो श्राद्ध कर्म या तर्पण करने के भारत में कई स्थान है, लेकिन पवित्र फल्गु नदी के तट पर बसे प्राचीन गया शहर की देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी पितृपक्ष और पिंडदान को लेकर अलग पहचान है। पुराणों के अनुसार पितरों के लिए खास आश्विन माह के कृष्ण ...
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जब कोई देह छोड़ता है तो वह उसके कर्मों के अनुसार कई तरह की संभावनाएं बनती है। पहला यह कि वह अन्य योनी धारण कर लेता है, दूसरा पितृलोक चला जाता है, तीसरा वह कई काल तक प्रेत योनी में भटकता रहता है और चौथा वह अनिश्‍चितकाल तक
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घर में अपने मृतकों के चित्र कहां लगाएं और कहां नहीं लगाएं इस संबंध में वास्तु शास्त्र में स्पष्ट उल्लेख मिलता है। गलत स्थान पर चित्र लगाने का बुरा असर होता है। अत: अपने मृतकों या पूर्वजों के चित्र आप उचित‍ स्थान पर ही लगाएं। आओ जानते हैं कुछ खास 5 ...
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हमारे पितृ या पूर्वज कई प्रकार के होते हैं। उनमें से बहुतों ने तो दूसरा जन्म ले लिया और बहुतों ने पितृलोक में स्थान प्राप्त कर लिया है। पितृलोक में स्थान प्राप्त करने वाले हर वर्ष श्राद्ध पक्ष में अपने वंशजों को देखने आते हैं और उस वक्त वे उन्हें ...
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हमारे पितृ या पूर्वज कई प्रकार के होते हैं। उनमें से बहुतों ने तो दूसरा जन्म ले लिया और बहुतों ने पितृलोक में स्थान प्राप्त कर लिया है। पितृलोक में स्थान प्राप्त करने वाले हर वर्ष श्राद्ध पक्ष में अपने वंशजों को देखने आते हैं और उस वक्त वे उन्हें ...
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हमारे पितृ या पूर्वज कई प्रकार के होते हैं। उनमें से बहुतों ने तो दूसरा जन्म ले लिया और बहुतों ने पितृलोक में स्थान प्राप्त कर लिया है। पितृलोक में स्थान प्राप्त करने वाले हर वर्ष श्राद्ध पक्ष में अपने वंशजों को देखने आते हैं और उस वक्त वे उन्हें ...
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अशोक का असली वृक्ष अब कम ही देखने को मिलता है। हालांकि अधिकतर घरों के सामने लंबे लंबे अशोक के वृक्ष लगे हुए मिलता है। क्या यह सचमुच ही अशोक के वृक्ष हैं? आओ जानते हैं अशोक के वृक्ष के बारे में रोचक जानकारी।
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दक्षिण भारत में असुरराज विरोचन के पुत्र राजा बलि की तो उत्तर भारत में कश्यप पुत्र भगवान वामन की पूजा का महत्व है। विष्णु के पांचवें अवतार वामन की पूजा भाद्रपद की शुक्ल द्वादशी को होती है जबकि बलि की पूजा भाद्रपद में त्रयोदशी को होती है। इस दिन को ...
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भगवान विष्णु ने सिर्फ मनुष्‍य रूप में ही अवतार नहीं लिया था। उन्होंने समय और परिस्थिति अनुसार अन्य रूप में अवतार भी लिया था। ऐसे ही 5 अवतारों की संक्षिप्त जानकारी।
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