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भगवान गणेशजी की पुत्री का जन्म कैसे हुआ, जानिए रहस्य

शुक्रवार,नवंबर 29, 2019
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भूथाथ या भूतनाथ अलवर (4203 ईसा पूर्व) बारह अलवरों में से एक है। उनका जन्म महाबलीपुरम में हुआ था। वे भगवान विष्णु के प्रति बहुत समर्पित थे, और हमेशा उनका नाम जपते रहते थे। बाहरी दुनिया से बिना किसी लगाव के केवल उनके बारे में ही सोचते रहते थे। इसलिए ...
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पूषन एक वैदिक देवता है। पूषन वह देवता हैं जो विवाह के संचालन में मदद करते, सुरक्षित यात्रा प्रदान करते और उन दिलों में वास करते हैं जो पशुओं को भोजन खिलाते हैं। वह हमारे कर्मों के अनुसार वे फल देते हैं। वह आत्माओं को दूसरे संसार की यात्रा करने के ...
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पार्वती देवी को दक्षिण भारत में अम्मन के नाम से भी जाना जाता है जिन्हें 'अम्मा" नाम से पुकारा जाता है, जो हिंदू देवी हैं और जिनमें श्रेष्ठ दैवीय ताकत और शक्ति है। हिंदू धर्म की सबसे महत्वपूर्ण देवियों में से एक हैं वह सौम्य देवी हैं।
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पवन देव वायु के एक हिन्दू देवता हैं और वे हनुमान एवं भीम के पिता हैं। वह स्वर्ग के देवता भगवान इंद्र द्वारा नियंत्रित किए जाते हैं। वह भगवान विष्णु के सच्चे भक्त हैं।
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हिन्दू देवी माता उषा

बुधवार,नवंबर 13, 2019
उषा को ऋग्वेद में एक शक्तिशाली देवी के रूप में माना जाता है और उनके महत्व का उल्लेख कई अन्य पवित्र ग्रंथों में भी किया गया है इसमें देवी शक्ति की शक्तियां भी शामिल हैं। ;उन्हें अन्य वैदिक देवताओं जैसे इंद्र, वरुण, अग्नि, सूर्य और सोम के समकक्ष माना ...
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प्रतिवर्ष कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को सहस्रबाहु जयंती मनाई जाती है। कार्तवीर्य अर्जुन के हैहयाधिपति, सहस्रार्जुन, दषग्रीविजयी, सुदशेन, चक्रावतार, सप्तद्रवीपाधि, कृतवीर्यनंदन, राजेश्वर आदि कई नाम होने का वर्णन मिलता है। सहस्रबाहु ...
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महर्षि अगस्त्य मुनि

शुक्रवार,नवंबर 1, 2019
परिचय : हिन्दू धर्म में अगस्त्य मुनि एक प्रसिद्ध संत हैं। उनकी पत्नी का नाम लोपामुद्रा था। रामायण और महाभारत में संत अगस्त्य मुनि का उल्लेख मिलता है। वह प्रसिद्ध सप्त ऋषियों में से एक और प्रसिद्ध 18 सिद्धों में से भी एक हैं। ऐसा माना जाता है कि वह ...
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बहुत कम लोग जानते हैं कि क्षेत्रपाल कौन होते हैं। जब वास्तु पूजा की जाती है तो उसके अंतर्गत क्षेत्रपाल की पूजा भी होती है। भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी आपको क्षेत्रपाल के मंदिर मिल जाएंगे। खासकर राजस्थान और उत्तराखंड में क्षेत्रपाल के कई ...
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विश्वामित्र वैदिक काल के विख्यात ऋषि थे। सभी ने उनका नाम सुना ही होगा। आओ जानते हैं उनके 6 खास किस्से।
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सभी जानते हैं कि अभिमन्यु चक्रव्यूह में फंसकर इसलिए मारे गए थे क्योंकि उन्हें चंद्रव्यूह को भेदना नहीं याद था लेकिन इसके अलावा 4 कारण ऐसे थे जिसके चलते अभिमन्यु मारे गए।
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माता सती और पार्वती की कई बहनें थीं। सभी देवियां हैं। उन्हीं में से एक देवी तारा के बारे में जानिए महत्वपूर्ण जानकारी।
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कहते हैं कि देवी के विभिन्न रूप को उनके वाहन, पहनावे, हाथ और शस्त्रों के अनुसार पहचाना जाता है। देवी का वाहन उल्लू और गज है। बहुत सी जगह वह कमल पर विराजमान है। हर देवी का अलग ही रूप है। आजो जानते हैं कि गजलक्ष्मी कौन है।
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विश्वकर्मा एक महान ऋषि और ब्रह्ममानी थे। ऋग्वेद में उनका उल्लेख मिलता है। कहते हैं कि उन्होंने ही देवताओं की घर, नगर, अस्त्र-शस्त्र आदि का निर्माण किया था। वे महान शिल्पकार थे। आओ जानते हैं उनके संबंध में 5 अनसुनी बातें।
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चंद्रमंडल में स्थित पितृलोक में अर्यमा सभी पितरों के अधिपति नियुक्त हैं। वे जानते हैं कि कौन सा पितृत किस कुल और परिवार से है। पुराण अनुसार उत्तरा-फाल्गुनी नक्षत्र इनका निवास लोक है।
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भगवान श्रीविष्णु के 24 से अधिक अवतार लिए हैं। उनमें से 5 अवतार ऐसे हैं जिनके बारे में लोग कम ही जानते होंगे। हालांकि बहुतों ने तो नाम भी नहीं सुना होगा। यहां ऐसे ही 5 अवतारों की संक्षिप्त जानकारी।
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मोदक प्रिय श्री गणेशजी विद्या-बुद्धि और समस्त सिद्धियों के दाता हैं तथा थोड़ी उपासना से ही प्रसन्न हो जाते हैं। उन्हें हिन्दू धर्म में प्रथम पूज्य देवता माना गया है। किसी भी कार्य को प्रारंभ करने के पूर्व उन्हीं का स्मरण और पूजन किया जाता है। आओ ...
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विश्वकर्मा की पुत्री संज्ञा से भगवान सूर्य के पुत्र यमराज, श्राद्धदेव मनु और यमुना उत्पन्न हुईं। हिन्दू धर्म में दक्षिण दिशा के दिक् पाल यमराज को यमलोक का अधिपति और मृत्यु का देवता माना जाता है। वे जीवों के शुभाशुभ कर्मों के अनुसार न्याय करते हैं।
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भगवान श्रीकृष्ण को पूर्णावतार माना जाता है। 64 कलाओं में दक्ष श्रीकृष्ण ने हर क्षेत्र में अपने व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है। वैसे तो भगवान श्रीकृष्ण के सैंकड़ों रूप और रंग हैं लेकिन आओ हम जानते हैं कि उनके 12 रूप।
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अल्लामा प्रभु 12वीं सदी के कन्नड़ संत और एक प्रसिद्ध कवि थे जो स्वयं (आत्मा) के महत्व को समझते थे और वे लोगों को उनकी आत्मा में आध्यात्मिक ऊर्जा भरने और उनकी आत्मा में भगवान के रहने का अनुभव करने के लिए जोर देते थे।
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