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शालिग्राम को घर में रखने के ये 5 नियम नहीं मानेंगे तो हो जाएंगे बर्बाद

मंगलवार,नवंबर 12, 2019
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व्रत ही तप है। यह उपवास भी है। हालांकि दोनों में थोड़ा फर्क है। व्रत में मानसिक विकारों को हटाया जाता है तो उपवास में शारीरिक। मानसिक और शारीरिक दोनों ही तरह के संयम का नवरात्रि में पालन करना जरूरी है अन्यथा आप नवरात्रि में व्रत या उपवास ना ही रखें ...
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नवरात्रि का पर्व साधना और भक्ति का पर्व है। वर्ष में चार नवरात्रियां अर्थात 36 रात्रियां होती हैं। इसमें से चैत्र एवं अश्‍विन माह की नवरात्रियां गृहस्थों की साधना के लिए और आषाढ़ एवं पौष की नवरात्रियां साधुओं द्वारा की जा रही गुप्त साधना के लिए होती ...
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भूले-बिसरे समस्त पितरों का इस अमावस्या को श्राद्ध किए जाने को लेकर ही इस तिथि को सर्वपितृ अमावस्या कहा जाता है। अश्‍विन माह की अमावस्या तिथि पितरों के श्राद्ध के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होती है। आओ जानते हैं इसके बारे में 3 महत्वपूर्ण बातें।
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आश्विन माह की कृष्ण अमावस्या को सर्वपितृ मोक्ष श्राद्ध अमावस्या कहते हैं। यह दिन पितृपक्ष का आखिरी दिन होता है। अगर आप पितृपक्ष में श्राद्ध कर चुके हैं तो भी सर्वपितृ अमावस्या के दिन पितरों का तर्पण करना जरूरी होता। आओ जानते हैं इस संबंध में 4 खास ...
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यदि आपने इस श्राद्ध में पिण्डदान नहीं किया है जो सर्वपितृ अमावस्या पर कर सकते हैं।
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प्रत्येक माह में दो चतुर्थी होती है। इस तरह 24 चतुर्थी और प्रत्येक तीन वर्ष बाद अधिमास की मिलाकर 26 चतुर्थी होती है। सभी चतुर्थी की महिमा और महत्व अलग अलग है। आओ जानते हैं चतुर्थी का रहस्य।
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वर्ष में 24 चतुर्दशी होती है। मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव का व्रत और पूजन करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है. जीवन में आने वाले बुरे समय और विपत्तियों को भी यह दूर करता है।
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हिन्दुओं के प्रमुख 10 नियमों में से एक है श्राद्ध करना। ये 10 नियम हैं- ईश्वर प्राणिधान, संध्या वंदन, श्रावण माह व्रत, तीर्थ चार धाम, दान, मकर संक्रांति-कुंभ पर्व, पंच यज्ञ, सेवा कार्य, 16 संस्कार और धर्म प्रचार। श्राद्ध का पर्व भाद्रपद की पूर्णिमा ...
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हिन्दू धर्म में वैसे तो कई रहस्यों का वर्णन किया गया है और उन रहस्यों को किस तरह जाना जा सकता है इस बारे में भी विस्तार से बताया गया है। लेकिन हम यहां बता रहे हैं आपको मात्र 7 ऐसे रहस्य जिन्हें जान लिया तो फिर कुछ भी जानने को बचेगा नहीं। जहां तक ...
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रामदूत हनुमानजी को ब्रह्मचारी, पवित्र, भक्त, प्रेमी, असुरनिकंदन और महाबली कहा गया है। अत: जहां जिस घर में हनुमानजी की पूजा हो रही हो उस घर का पवित्र होना जरूरी है अन्यथा हनुमानजी रुष्ठ हो जाते हैं। हनुमानजी ऐसे किसी घर या स्थान पर नहीं जाते हैं जहां ...
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भगवान गणेशजी को प्रथम पूज्य तब से माना जाता है जब से कि उन्होंने देवताओं की एक प्रतियोगिता में धरती के बजाय अपने माता-पिता की ही परिक्रमा करके एक आदर्श स्थापित किया था। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान श्री गणेश के पूर्व किसकी प्रथम रूप से पूजा होती ...
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चन्द्रमा की 16वीं कला को 'अमा' कहा गया है जिसमें चन्द्रमा की 16 कलाओं की शक्ति शामिल है। अमा के अनेक नाम आए हैं, जैसे अमावस्या, सूर्य-चन्द्र संगम, पंचदशी, अमावसी, अमावासी या अमामासी।
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सावन के आखिरी सोमवार को हिन्दू तीर्थयात्रियों ने चीन के तिब्बत स्वशासी क्षेत्र में स्थित कैलाश पर्वत के पास मानसरोवर झील किनारे हवन और पूजन किया। इस पर अली प्रीफेक्चर के डिप्टी कमिश्नर जी. किंगमिन ने कड़ी आपत्ति दर्ज कर कहा कि भारतीय तीर्थयात्री ...
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रसोई घर में बरकत के उपाय के उपाय के लिए सबसे पहले आपको भोजन के पूर्व क्या करें, क्या ना करें और भोजन के बाद क्या करें यह जानना जरूरी है। घर में बरकत आने के उपाय के तौर पर नीचे कुछ नियम बताएं गए हैं।
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तुलसी के विभिन्न प्रकार के पौधे मिलते हैं- जैसे श्रीकृष्ण तुलसी, लक्ष्मी तुलसी, राम तुलसी, भू तुलसी, नील तुलसी, श्वेत तुलसी, रक्त तुलसी, वन तुलसी, ज्ञान तुलसी आदि। आओ जानते हैं कि हिन्दू धर्म में क्या है तुसली का महत्व।
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हिन्दू कैलेंडर अनुसार आषाढ़ माह के बाद श्रावण माह लगता है। श्रावण और भाद्रपद 'वर्षा ऋतु' के मास हैं। वर्षा नया जीवन लेकर आती है। मोर के पांव में नृत्य बंध जाता है। यह माह जुलाई-सितंबर में पड़ता है।
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यदि आप चण्‍डीपाठ यानी दुर्गा सप्‍तशती का पाठ करने करने जा रहे हैं, तो कुछ सावधानियां बरतना आपके लिए बहुत ही जरूरी है अन्‍यथा अच्‍छे के स्‍थान पर बुरे परिणाम भी भोगने पड़ सकते हैं, जो कि चण्‍डी पाठ करने वाले प्रत्‍येक व्‍यक्ति का अनुभव है।
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हिन्दू धर्म में समय की बहुत ही वृहत्तर धारणा है। आमतौर पर वर्तमान में सेकंड, मिनट, घंटे, दिन-रात, माह, वर्ष, दशक और शताब्दी तक की ही प्रचलित धारणा है,
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हिन्दू धर्म में 16 संस्कारों में से एक कर्ण वेध संस्कार का उल्लेख मिलता है। इसे उपनयन संस्कार से पहले किया जाता है। सवाल यह उठता है कि आखिर हम कान क्यों छिदवाना चाहिए या क्यों छिदवाते हैं।
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