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मंदिर में इस तरह करते हैं दर्शन और पूजा, जानिए 9 चरण

शनिवार,जनवरी 18, 2020
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18 सिद्धों में से एक बोगर एक तमिल सिद्धार थे जो 550 से 300 ईसा पूर्व के बीच हुए थे। बोगर ने एक किताब 'बोगर 7000' लिखी है। बोगर 7000 में 7000 गाने हैं, और इसमें सिद्ध चिकित्सा के बारे में विवरण है।
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ज्योतिष की एक मान्यता अनुसार प्रथम भाव से खानदानी दोष देह पीड़ा, द्वितीय भाव आकाश देवी, तृतीय भाव अग्नि दोष, चतुर्थ भाव प्रेत दोष, पंचम भाव देवी-देवताओं का दोष, छठा भाव ग्रह दोष, सातवां भाव लक्ष्मी दोष, आठवां भाव नाग दोष, नवम भाव धर्म स्थान दोष, दशम ...
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करीब 58 दिनों तक मृत्यु शैया पर लेटे रहने के बाद जब सूर्य उत्तरायण हो गया तब माघ माह की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को भीष्म पितामह ने अपने शरीर को छोड़ा था, इसीलिए यह दिन उनका निर्वाण दिवस है। आओ जानते हैं भीष्म पितामह के बारे में 10 रोचक तथ्य।
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हर कोई जानना चाहेगा कि मरने के बाद उसकी गति कैसी होगी या वह अगला जन्म कहां लेगा। हालांकि इस संबंध में कुछ भी निश्चित तौर पर कहना मुश्‍किल है। फिर भी धर्म और ज्योतिष शास्त्र में इसके कुछ संकेत बताए गए हैं।
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शुक्राचार्य का नाम तो सभी ने सुना होगा। वे दैत्य अर्थात असुरों के गुरु थे। उनकी ख्‍याति दूर-दूर तक फैली थी। आओ जानते हैं उनके बारे में 10 रोचक जानकारी।
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कहते हैं कि कुंडली में आपके पिछले जन्म की स्थिति लिखी होती है। यह कि आप पिछले जन्म में क्या थे। कुंडली, हस्तरेखा या सामुद्रिक विद्या का जानकार व्यक्ति आपके पिछले जन्म की जानकारी के सूत्र बता सकता है। यह लेख ज्योतिष की मान्यता पर आधारित है।
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पुत्र की कामना से शांतनु के पिता प्रतीप गंगा के किनारे तपस्या कर रहे थे। उनके तप, रूप और सौन्दर्य पर मोहित होकर गंगा उनकी दाहिनी जंघा पर आकर बैठ गईं और कहने लगीं, 'राजन! मैं आपसे विवाह करना चाहती हूं। मैं जह्नु ऋषि की पुत्री गंगा हूं।'
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रामानंद अर्थात रामानंदाचार्य वैष्णव भक्तिधारा के महान संत हैं। उन्होंने उत्तर भारत में वैष्णव सम्प्रदाय को पुनर्गठित किया तथा वैष्णव साधुओं को उनका आत्मसम्मान दिलाया।
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टेलीपैथी को हिन्दी में दूरानुभूति कहते हैं। 'टेली' शब्द से ही टेलीफोन, टेलीविजन आदि शब्द बने हैं। ये सभी दूर के संदेश और चित्र को पकड़ने वाले यंत्र हैं। आदमी के मस्तिष्क में भी इस तरह की क्षमता होती है। भविष्य भी वर्तमान से थोड़ा दूर ही है इसे भी ...
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हिन्दू कैलेंडर किस तरह एक वैज्ञानिक कैलेंडर है यह जानने के लिए लिए हमें समझना होगा खगोल विज्ञान को, क्योंकि हिन्दू कैलेंडर सिर्फ चंद्र या सूर्य के भ्रमण पर आधारित नहीं है। यह ऐसा कैलेंडर है जिससे हजारों वर्ष होने वाले ग्रहण और हजारों वर्ष पूर्व हो ...
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अंडाल एक महिला महान अलवर संत एवं कवि है। वह 12 अलवर संतों में से एक मात्र महिला संत है। जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन भगवान विष्णु की भक्ति के लिए समर्पित कर दिया था। माना जाता है कि उनका जन्म 7 वीं शताब्दी ईस्वी के दौरान श्रीविल्लिपुथुर में हुआ था।
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हिन्दू धर्म में बहुत सारी बुराइयों का समावेश हो चला है। मनमाने तीर्थ, यज्ञ, पूजा, त्योहार आदि का प्रचलन हो चला है। लोग सोलह संस्कारों की वैदिक रीति को छोड़कर अन्य रीतियों से कर्म करने लगे हैं। लोग ईश्‍वर, भगवान, देवी-देवता को छोड़कर जीवित इंसानों, ...
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सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में संक्रमण करने को संक्रांति कहते हैं। वर्ष में 12 संक्रांतियां होती है जिसमें से 4 संक्रांति ही महत्वपूर्ण हैं जिनमें मेष, तुला, कर्क और मकर संक्रांति प्रमुख हैं। मकर संक्रांति के दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में ...
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हनुमानजी के आपने बहुत सारे चित्र देखें होंगे। जैसे, हवा में उड़ते हुए, पर्वत उठाते हुए या रामजी की भक्ति करते हुए। आज हम आपको बताते हैं हनुमानजी के उन चित्रों के बारे में जिन्हें घर में लगाने से मिलता है अपार लाभ।
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आप इसे मानें या न मानें। मान्यता अनुसार कुछ खास दिनों में कुछ खास कार्य करने से बचना चाहिए। ये कुछ खास दिन यहां प्रस्तुत हैं। जानकार लोग तो यह कहते हैं कि तेरस, चौदस, पूर्णिमा, अमावस्या और प्रतिपदा उक्त 5 दिन पवित्र बने रहने में ही भलाई है, क्योंकि ...
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स्वामी विवेकादंन के बारे में भारत के युवा कितना जानते हैं? शायद बहुत कम या शायद बहुत ज्यादा? आओ जानते हैं 8 पॉइंट में उनके बारे में कुछ खास।
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महाभारत और पुराणों में यवनों का उल्लेख मिलता है। ये यवन कौन थे इस संबंध में पुराण, महाभारत में कुछ और ही उल्लेख मिलता है जबकि भारतीय इतिहास के जानकार कुछ और ही कहते हैं। यहां प्रस्तुत है पुराण और महाभारत के अनुसार यवन के बारे में संक्षिप्त जानकारी।
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हिन्दू देवी भूदेवी का परिचय

शुक्रवार,जनवरी 10, 2020
धरती देवी के लिए संस्कृत नाम पृथ्‍वी है और उन्हें भूदेवी कहा जाता है साथ ही साथ हिन्दू धर्म में उन्हें भूमीदेवी भी कहा जाता है और वह भगवान विष्णु की पत्नी थीं। उन्हें बौद्ध ग्रंथों में भी वर्णित किया गया है। ऋग्वेद और कई प्राचीन पवित्र ग्रंथों में ...
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आश्रम व्यवस्था को जीवन या उम्र के चार हिस्सों में बांटा गया है। पहला विद्यार्थी जीवन, दूसरा दांपत्य या गृहस्थ जीवन, तीसरा शिक्षात्मक या आचार्य का जीवन और चौथा संन्यासी का जीवन। उक्त चार को नाम दिया गया ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास।
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