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बल्लेबाजों के लिए कब्रगाह बनी फिरोजशाह कोटला की पिच के कारण आलोचनाएँ झेल रहे क्यूरेटर ने साफ किया कि ई पिच होने के साथ ही बरसात में देरी और बरमुडा घास उगाने में कामयाबी नहीं मिलने से विकेट पर गेंद धीमी और नीची आ रही है।

कोटला की इस नई पिच पर बल्लेबाजों के लिए रन बनाना बहुत मुश्किल रहा है और यही वजह है कि चैंपियन्स लीग के इस पिच पर खेले गये छह मैच की 12 पारियों में से केवल दो में स्कोर 130 रन के ऊपर गया। यहाँ तक की तीन बार टीमें सैकड़े को भी नहीं छू पाई लेकिन सहायक क्यूरेटर विजय बहादुर मिश्रा ने कहा कि प्रत्येक नई पिच का मिजाज इसी तरह का होता है।

मिश्रा ने कहा कि हमने इस पिच को जून में बनाना शुरू किया और अगस्त के शुरू में जाकर यह तैयार हुई। किसी भी नई पिच को तैयार होने में आठ से नौ महीने लगते हैं और यह भी अगले साल मार्च में जाकर आदर्श पिच बनेगी। आईपीएल के तीसरे सत्र में भी यदि इसका मिजाज ऐसा ही रहता है तो फिर हम जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार हैं।

उन्होंने कहा ‍कि यदि पंद्रह अगस्त तक बारिश समाप्त हो जाती तो इस समय भी पिच पर गेंद इतनी अधिक नीची नहीं रहती लेकिन इस बार बारिश देर से शुरू हुई। यहाँ तक कि सितंबर के आखिर तक बारिश आती रही जिससे पिच को पर्याप्त धूप नहीं मिली। इसके अलावा हमने पिच पर बरमुडा घास उगाने की कोशिश की जिसमें हम मात खा गए। यदि घास उग आती तो पिच इस समय काफी अच्छी बन जाती।

कोटला में चैंपियन्स लीग का पहला मैच 9 अक्टूबर को न्यू साउथ वेल्स और ईगल्स के बीच खेला गया। ऑस्ट्रेलियाई क्लब ने तो छह विकेट पर 144 रन बनाए लेकिन ईगल्स नौ विकेट पर 91 रन ही बना पाया, जिसके बाद उसके कप्तान बोएता डिपेनार ने विकेट की कड़ी आलोचना की थी।

डिपेनार ने कहा था हमें पता था कि यह नई पिच है और इसमें गेंद धीमी और नीची रहेगी लेकिन विकेट इतना धीमा खेलेगा इसका मुझे विश्वास नहीं था। हम कभी ऐसी परिस्थितियों में नहीं खेले। यहाँ तक कि जब दिल्ली डेयरडेविल्स की टीम अपने पहले मैच में इस विकेट पर आठ विकेट पर 98 रन ही बना पाई तो कप्तान गौतम गंभीर पिच से नाखुश दिखे थे।

उन्होंने कहा कि किसी भी बल्लेबाज को यह अनुमान नहीं था कि गेंद इतनी नीची रहेगी। इस बीच क्यूरेटर ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच 31 अक्टूबर को होने वाले एकदिवसीय मैच के लिए अच्छा विकेट तैयार किया जाएगा और उसमें 250 से अधिक रन बनेंगे।

मिश्रा ने कहा कि इस पिच पर अभी टेस्ट मैच आयोजित नहीं किए जा सकते हैं लेकिन एकदिवसीय और ट्वेंटी- 20 के लिहाज से यह अच्छी पिच है। जब इसमें वनडे होगा तब तक इसमें घास उग आएगी और मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि इसमें 270 से 280 तक का स्कोर बनेगा।

कोटला में इस साल अप्रैल से ही भारतीय क्रिकेट बोर्ड की पिच समिति के प्रमुख दलजीत सिंह की देखरेख में नई पिच डालने की तैयारियाँ की गई थी जबकि जून से इसमें खुदाई हुई थी। पिच वाले भाग की 13 इंच खुदाई की गई थी । इसमें नीचे से चार इंच में रेत, चार इंच खेत की मिट्टी और छह इंच काली मिट्टी डाली गयी है।

यही नहीं बारिश का पानी पिच पर नहीं रुके इसके लिए इसके चारों तरफ 24 इंच के पीवीसी पाइप भी डाले गए हैं। मिश्रा ने कहा कि हमने इसे ऑस्ट्रेलियाई तरीके से तैयार किया है। अभी यह डेढ़ से दो इंच ऊँची है तथा अगले साल अप्रैल में हम इसमें लगभग डेढ़ इंच और मिट्टी डालेंगे।

उन्होंने कहा कि नई पिच को बच्चे की तरह पाला जाता है लेकिन लोग तुरंत परिणाम चाहते हैं जो कि संभव नहीं है। मुझे खुशी है कि श्रीलंका के पूर्व कप्तान महेला जयवर्धने इस बात को अच्छी तरह से समझ पाए।

चैंपियन्स लीग के दौरान जयवर्धने ही ऐसे बल्लेबाज थे, जिन्होंने माना कि ई पिच इसी तरह से व्यवहार करती है। मैं खिलाड़ी होने के नाते पिच की आलोचना नहीं करता। नई पिच पर हमेशा गेंद धीमी और नीची रहती है। परिस्थितियों से सही तालमेल बिठाना खिलाड़ियों का काम है।
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