सेमीफाइनल का सपना लिए विश्व कप में उतरी भारतीय हॉकी टीम अब सातवें स्थान के लिए क्वासीफिकेशन मुकाबले में कल अर्जेंटीना से भिड़ेगी जो टूर्नामेंट में पिछले 16 साल में उसका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन होगा।
भारतीय टीम 1994 विश्व कप में पाँचवें स्थान पर रही थी। इसके बाद 1998 (नौवें ), 2002 (10वें) और 2006 (11वें) उसका प्रदर्शन लगातार गिरता गया।
अपनी मेजबानी में 28 बरस बाद हो रहे विश्व कप में पहले ही मैच में चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान पर 4-1 से बेहतरीन जीत दर्ज करके राजपाल सिंह की टीम ने पदक जीतने की उम्मीदें जताई थी लेकिन बाद में मैच दर मैच लचर प्रदर्शन से उस पर घड़ों पानी फिर गया।
विश्व कप में चमत्कारिक प्रदर्शन की उम्मीद नहीं करने की बारंबार दुहाई देने वाले स्पेनिश कोच जोस ब्रासा ने स्वीकार किया कि यूरोपीय टीमों की तरह तेज रफ्तार हॉकी का शउर सीखने में भारत को समय लगेगा।
ब्रासा ने कहा‘ऑस्ट्रेलिया, हॉलैंड, जर्मनी और इंग्लैंड जिस तरह खेलते हैं, हम रफ्तार में उनका मुकाबला नहीं कर सकते। वैसी रफ्तार और स्टेमिना हासिल करके ही हम फिर इस बिग लीग में शामिल हो सकते हैं।’(भाषा)