0

पतंग पर 20 लाजवाब शेर, इन्हें पढ़कर मन खुशी से उड़ने लगेगा

सोमवार,जनवरी 13, 2020
sher o shayari on kites
0
1
मिर्ज़ा ग़ालिब उन बिरले कवियों में से हैं जिनको चाहे अभीष्ट प्रशंसा उनके जीवन में न मिली हो किंतु उनकी योग्यता और विद्वत्ता की धाक सभी पर जमी हुई थी।
1
2
गालिब को उनके हासिद अक्सर फहश ख़त लिखा करते थे- किसी ने एक ख़त मे गालिब को मां की गाली लिखी। पढ़कर गालिब मुस्कुराए और कहने लगे- उल्लू को गाली देना भी नहीं आती
2
3
आज इक और बरस बीत गया उस के बग़ैर जिस के होते हुए होते थे ज़माने मेरे
3
4
वो आजादी, मिली हमको बड़ी कुर्बानियां देकर। लुटाकर अपने मोती, लाजपत की पसलियां देकर। भगत, उधम, सुभाष, आजाद क्या खोए नहीं हमने। लहू से सींच दी 'जलियांवाला' की जमीं हमने
4
4
5
एक बार कह दिया तो फिर करके दिखाने वाले 'पं. चंद्रशेखर आजाद' को बचपन में एक बार अंग्रेजी सरकार ने 15 कोड़ों का दंड दिया तभी उन्होंने प्रण किया कि वे अब कभी पुलिस के हाथ नहीं आएंगे। वे गुनगुनाया करते थे
5
6
होली पर रंगबिरंगी शेरो-शायरी, पढ़ें साहित्यकारों की नजर से।
6
7
जब फागुन के रंग झमकते हों तब देख बहारें होली की। और डफ के शोर खड़कते हों तब देख बहारें होली की।
7
8
मिर्ज़ा ग़ालिब उर्दू के एक ऐसे शहंशाह हैं जिनका शेर जिंदगी के किसी भी मौके पर इस्तेमाल किया जा सकता है। यहां पाठकों के लिए प्रस्तुत है गालिब की कुछ चुनिंदा शायरियां...
8
8
9
मिर्जा गालिब का जन्म 27 दिसंबर 1717 को काला महल, आगरा में हुआ था। उनकी कलम ने दिल की हर सतह को छुआ, किसी भी मोड़ पर कतराकर नहीं निकले।
9
10
मिर्ज़ा उन बिरले शायरों में से हैं जिनको चाहे अभीष्ट प्रशंसा उनके जीवन में न मिली हो किंतु उनकी योग्यता और विद्वत्ता की धाक सभी पर जमी हुई थी। हिंदुस्तान के विभिन्न प्रदेशों में उनके शिष्य थे जिनमें उस समय के नवाब, सामंत, सरकारी पदाधिकारी सभी शामिल ...
10
11
इंदौरी की शायरी एक खूबसूरत कानन है, जहां मिठास की नदी लहराकर चलती है। विचारों का, संकल्पों का पहाड़ है, जो हर अदा से टकराने का हुनर रखता है। फूलों की नाजुकता है,
11
12

नज्म : मेरे महबूब !

सोमवार,जनवरी 9, 2017
मेरे महबूब ! तुम्हारा चेहरा मेरा कुरान है, जिसे मैं अजल से अबद तक पढ़ते रहना चाहती हूं...
12
13
लगाया दांव पर दिल को जुआरी है, मगर हारा कि दिल क्या, जान हारी है। पयामे-यार आना था नहीं आया, कहें किससे कि कितनी बेकरारी है। झुकाकर सर खड़े होना जरूरी सा, जहां सरकार की निकली सवारी है। कभी इक पल नजर थी जाम पर डाली, अभी तक, मुद्दतें गुजरीं, खुमारी ...
13
14
घबराइए मत…! अभी बारिश का मौसम शुरू नहीं हुआ है यह तो इंद्रदेव अपनी पिचकारी चेक कर रहे थे…होली आने वाली है रंगों से नहीं डरे...
14
15

नज़्म - कली का मसलना देखा

सोमवार,मार्च 7, 2016
रात के पिछले पहर मैंने वो सपना देखा, खि‍लने से पहले, कली का वो मसलना देखा, एक मासूम कली, कोख में मां के लेटी, सिर्फ गुनाह कि नहीं बेटा, वो थी इक बेटी, सोचे बाबुल कि जमाने में होगी हेटी, बेटी आएगी पराए धन की एक पेटी
15
16

नज़्म - कली क्यूं झरे

सोमवार,मार्च 7, 2016
मां मेरे कत्ल की तू हां क्यूं भरे? खि‍लने से पहले इक कली क्यूं झरे ?मेरे बाबुल बता, मेरी क्या ख़ता? मेरे मरने की बददुआ क्यूं करे ?
16
17
चांद तन्हा है आसमां तन्हा...चांद तनहा है आसमां तन्हा, दिल मिला है कहां-कहां तनहा, बुझ गई आस, छुप गया तारा, थरथराता रहा धुआं तन्हा
17
18
हिन्दी से जो लोग उर्दू मंचों पर आ रहे हैं, उनकी शायरी में एक अलग ही ताज़गी और अलग ही चमक है।
18
19
कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता, कहीं ज़मीं तो कहीं आसमां नहीं मिलता, बुझा सका है भला कौन वक्त के शोले, ये ऐसी आग है जिसमें धुआं नहीं मिलता
19
विज्ञापन
Traveling to UK? Check MOT of car before you buy or Lease with checkmot.com®