0

जश्न-ए-आजादी : जमाने को नया रास्ता दिखा दिया हमने

गुरुवार,अगस्त 8, 2019
india
0
1

नज्म : मेरे महबूब !

सोमवार,जनवरी 9, 2017
मेरे महबूब ! तुम्हारा चेहरा मेरा कुरान है, जिसे मैं अजल से अबद तक पढ़ते रहना चाहती हूं...
1
2

नज़्म - कली का मसलना देखा

सोमवार,मार्च 7, 2016
रात के पिछले पहर मैंने वो सपना देखा, खि‍लने से पहले, कली का वो मसलना देखा, एक मासूम कली, कोख में मां के लेटी, सिर्फ गुनाह कि नहीं बेटा, वो थी इक बेटी, सोचे बाबुल कि जमाने में होगी हेटी, बेटी आएगी पराए धन की एक पेटी
2
3

नज़्म - कली क्यूं झरे

सोमवार,मार्च 7, 2016
मां मेरे कत्ल की तू हां क्यूं भरे? खि‍लने से पहले इक कली क्यूं झरे ?मेरे बाबुल बता, मेरी क्या ख़ता? मेरे मरने की बददुआ क्यूं करे ?
3
4
चांद तन्हा है आसमां तन्हा...चांद तनहा है आसमां तन्हा, दिल मिला है कहां-कहां तनहा, बुझ गई आस, छुप गया तारा, थरथराता रहा धुआं तन्हा
4
4
5
कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता, कहीं ज़मीं तो कहीं आसमां नहीं मिलता, बुझा सका है भला कौन वक्त के शोले, ये ऐसी आग है जिसमें धुआं नहीं मिलता
5
6
वो आजादी बहिश्तों की हवाएं दम भरें जिसका। वो आजादी फरिश्ते अर्श पर चरचा करें जिसका। वो आजादी शराफत जिसकी खातिर जान तक दे दे। जवानी जीस्त के उभरे हुए अरमान तक दे दे। वो आजादी, परिन्दे जिसकी धुन में गीत गाते हैं। वो आजादी, सितारे जिसकी लौ में जगमगाते ...
6
7

नज़्म---'निसार करूँ'

शुक्रवार,जनवरी 2, 2009
हसीन फूलों की रानाइयाँ निसार करूँ सितारे चाँद कभी, कहकशाँ निसार करूँ बहार पेश करूँ गुलसिताँ निसार करूँ जहाने-हुस्न की रंगीनियाँ निसार करूँ
7
8
मैं कोई शे'र न भूले से कहूँगा तुझ पर फ़ायदा क्या जो मुकम्मल तेरी तहसीन न हो कैसे अल्फ़ाज़ के साँचे में ढलेगा ये जमाल
8
8
9

नज़्म 'बलूग़त' (वयस्क)

सोमवार,दिसंबर 15, 2008
मेरी नज़्म मुझसे बहुत छोटी थी खेलती रहती थी पेहरों आग़ोश में मेरी आधे अधूरे मिसरे मेरे गले में बाँहें डाले झूलते रहते
9
10

रुबाइयाँ : मेहबूब राही

शुक्रवार,दिसंबर 12, 2008
हर बात पे इक अपनी सी कर जाऊँगा जिस राह से चाहूँगा गुज़र जाऊँगा जीना हो तो मैं मौत को देदूँगा शिकस्त मरना हो तो बेमौत भी मर जाऊँगा
10
11

नज़्म : 'तख़लीक़'

बुधवार,दिसंबर 10, 2008
मरमरीं ताक़ में दीपक रख कर, तेरी आँखों को बनाया होगा सुर्मा-ए-च्श्म की ख़ातिर उसने, फिर कोई तूर जलाया होगा
11
12

ईद-ए-क़ुरबाँ

बुधवार,दिसंबर 10, 2008
लेके पैग़ामे-मसर्रत आगया दिन ईद का आज सब ही ने भरी हैं क़हक़हों से झोलियाँ
12
13

नज़्म : 'जाने ग़ज़ल'

मंगलवार,दिसंबर 2, 2008
चाँद चेहरे को तो आँखों को कंवल लिक्खूँगा जब तेरे हुस्न-ए-सरापा पे ग़ज़ल लिक्खूँगा
13
14
हर तरफ़ जश्न-ए-बहाराँ, हर तरफ़ रंग-ए-निशात सूना-सूना है हमारे दिल का आँगन दोस्तो
14
15

क़तआत : रूपायन इन्दौरी

मंगलवार,नवंबर 25, 2008
कुछ करम में कुछ सितम में बाँट दी कुछ सवाल-ए-बेश-ओ-कम में बाँट दी ज़िन्दगी जो आप ही थी क़िब्लागाह हम ने वो देर-ओ-हरम में बाँट दी
15
16

नज़्म : 'सियासत में'

बुधवार,नवंबर 19, 2008
झूट की होती है बोहतात सियासत में सच्चाई खाती है मात सियासत में दिन होता है अक्सर रात सियासत में गूँगे कर लेते हैं बात सियासत में
16
17

नज़्म : नग़मा-ए-शौक़

मंगलवार,नवंबर 18, 2008
अब तक आए न अब वो आएँगे, कोई सरगोशियों में कहता है ख़ूगरे-इंतिज़ार आँखों को, फिर भी इक इंतिज़ार रहता है
17
18

मज़ाहिया क़तआत

शुक्रवार,नवंबर 14, 2008
बस तीन दिन हुए हैं बड़ीबी की मौत को सठया गए हैं दोस्तो कल्लू बड़े मियाँ चर्चा ये हो रहा है के सब भूल-भाल कर
18
19

नज़्म----क़ौमी यकजेहती (एकता)

मंगलवार,नवंबर 11, 2008
ये देश के हिन्दू और मुस्लिम तेहज़ीबों का शीराज़ा है सदियों पुरानी बात है ये, पर आज भी कितनी ताज़ा है
19
विज्ञापन
Traveling to UK? Check MOT of car before you buy or Lease with checkmot.com®