0

December 27 : महान शायर मिर्ज़ा ग़ालिब की जयंती पर पढ़ें विशेष आलेख

गुरुवार,दिसंबर 26, 2019
Mirza Ghalib
0
1
गालिब को उनके हासिद अक्सर फहश ख़त लिखा करते थे- किसी ने एक ख़त मे गालिब को मां की गाली लिखी। पढ़कर गालिब मुस्कुराए और कहने लगे- उल्लू को गाली देना भी नहीं आती
1
2
इंदौरी की शायरी एक खूबसूरत कानन है, जहां मिठास की नदी लहराकर चलती है। विचारों का, संकल्पों का पहाड़ है, जो हर अदा से टकराने का हुनर रखता है। फूलों की नाजुकता है,
2
3
हिन्दी से जो लोग उर्दू मंचों पर आ रहे हैं, उनकी शायरी में एक अलग ही ताज़गी और अलग ही चमक है।
3
4
'बहुत इंतिहाई आकर्षक आँखें, बिल्कुल हीरे की तरह चमकती हुईं। लंबे-लंबे बाल, जिन्हें वो निहायत ही दिलचस्प अंदाज़ से बार-बार पीछे की तरफ कर लेते और साथ ही एक बहुत दिलकश ज़हीन मुस्कुराहट के मालिक।' किसी शख़्स की तारीफ़ में कभी ये तमाम दिलफ़रेब बातें कही ...
4
4
5

उर्दू शायर बशर नवाज का निधन

गुरुवार,जुलाई 9, 2015
मुंबई। हिन्‍दी फिल्म बाजार के लोकप्रिय गीत 'करोगे याद तो हर बात याद आएगी' के रचनाकार और मशहूर उर्दू शायर बशर नवाज का संक्षिप्त बीमारी के बाद बुधवार महाराष्ट्र के औरंगाबाद में निधन हो गया। वह 79 वर्ष के थे।
5
6
गालिब के खास शागिर्द और दोस्त अक्सर शाम के वक़्त उनके पास जाते थे और मिर्ज़ा सुरूर के आलम में बहुत पुरलुत्फ बातें किया करते थे-
6
7
एक रोज़ बादशाह चन्द मुसाहिबों के साथ आम के बाग ' हयात बख्श ' में टहल रहे थे-साथ में गालिब भी थे- आम के पेडों पर तरह-तरह रंगबिरंगे आम लदे हुए थे- यहां का आम बादशाह और बेगमात के सवाय किसी को मोयस्सर नहीं आ सकता था-
7
8
यह बात आज भी संदिग्ध बनी हुई है कि मिर्जा ग़ालिब शिया थे या सुन्नी। इस संबंध में हमारी जानकारी का आधार उनकी अपनी रचनाएं हैं जिनमें स्वयं इतना अंतर्विरोध है कि उससे हम कोई निष्कर्ष नहीं निकाल सकते। बहुत-सी बातें ऐसी हैं कि जिनके पीछे कोई आस्था या ...
8
8
9
एक दिन हमने मिर्ज़ा ग़ालिब से पूछा कि 'तुमको किसी से मुहब्बत भी है?' कहा कि, 'हाँ हज़रत अली मुर्तज़ा से।' फिर हमसे पूछा कि 'आपको?' हमने कहा, 'वाह साहब, आप तो मुग़ल बच्चा होकर अली मुर्तुज़ा का दम भरें और हम उनकी औलाद कहलाएँ और मुहब्बत न रखें क्या यह ...
9
10

ग़ालिब के लतीफे : मेरा जूता

शनिवार,दिसंबर 27, 2014
एक दिन सय्यद सरदार मिर्ज़ा शाम को चले आए- जब थोड़ी देर रुक कर जाने लगे तो मिर्ज़ा खुद अपने हाथ में शमादान लेकर आए ताकि वह रोशनी में अपना जूता देख कर पहन लें- उन्होने कहा क़िबला ओ काबा, आपने क्यूं तकलीफ फरमाई- मैं अपना जूता आप पहन लेता-
10
11
ऐतिहासिक शहर आगरा में जन्मे और अपना प्रारंभिक जीवन यहीं बिताने वाले मशहूर शायर मिर्जा ग़ालिब आज की तारीख में आगरा की भीड़भाड़ तथा आधुनिक चकाचौंध में गुम से हो गए हैं।
11
12
जाने-माने उर्दू कवि और आलोचक शमसुर रहमान फारुकी ने अपनी किताब ‘द सन दैट रोज फ्रॉम द अर्थ’ में 1857 की लड़ाई में ‘कंपनी बहादुर’ के हाथों हार के बावजूद 18वीं और 19वीं सदी में उत्तर भारतीय शहरों दिल्ली और लखनऊ में उर्दू साहित्य संस्कृति के संपन्न बने ...
12
13
ग़ज़ल गायक जगजीत सिंह की पुण्यतिथि पर बाँसुरी वादक रोनू मजूमदार और भजन व ग़ज़ल गायक अनूप जलोटा से हुई बातचीत पर आधारित-
13
14
'किसी का यूँ तो हुआ कौन उम्र भर फिर भी, ये हुस्नों इश्क धोखा है सब मगर फिर भी'...ये शेर अपनेआप में एक बेबसी, इक इंतिज़ार और तमाम उम्मीदें जज़्ब किए हुए है। और एक उम्र तक अपने सीने में ये तमाम ख़लिश पाले रक्खी, मक़्बूल शाइर फ़िराक़ गोरखपुरी ने, यानी ...
14
15
बात उन दिनों से क़रीब 11 बरस पहले की है, जब हिंदुस्तान को चीरकर दो हिस्सों में तक़्सीम नहीं किया गया था। तब चिनाब, झेलम, सिंधु और रावी का पानी बिना किसी बँटवारे के गुनगुनाता आज़ाद बहता था। तब न कोई हिन्दू था, न कोई मुसलमान। तब लोग सिर्फ़ हिंदुस्तानी हुआ ...
15
16
फिल्म और थिएटर की मशहूर अदाकारा शबाना आज़मी ने अपने वालिद और हमारे वक्‍त के बेहतरीन व अज़ीम शायर कैफ़ी आज़मी की याद में इंटरनेट पर एक वेबसाइट लांच की है। इस वेबसाइट पर कैफ़ी की शायरी, वीडियो और उनके लिखे फिल्मी गीतों को संजोया गया है। अलावा इसके ...
16
17
कौन होगा, जो मशहूर शायर मुनव्वर राना के नाम से वाक़िफ़ न हो। जी हां ! वही मुनव्वर राना, जिनकी शायरी में दुनियादारी की चाहरदीवारी से घिरी एक माँ, खुलकर साँस लेती है। वही मुनव्वर राना, जिनके लिए जन्नत का रास्ता कहीं आसमान के उस पार से नहीं, बल्कि माँ ...
17
18
कहते हैं हर शब के बाद सहर और सहर के बाद फिर शब आती है। दोनों की उम्र क़रीब-क़रीब बराबर ही तय है। मगर कभी-कभी शब की उम्र सहर के मुकाबले दराज़ होने का अहसास होता है। अज़ीम शायर मेराज फैज़ाबादी के चले जाने से शायरी की दुनिया भी इन दिनों ऐसे ही एक ...
18
19
हर बरस की तरह इस दफ़ा भी सहने-उज्जैन ने अपनी गोद में अदब की महफ़िल आरास्ता करने की पूरी तैयारी कर ली थी। मुक़द्दस क्षिप्रा की मौजों ने भी तरन्नुम में पिरोए नग़मों और ग़ज़लों के नशेबो-फ़राज़ पर बेतहाशा झूमने के लिए अपने कनारों से इजाज़त ले ली थी।
19
विज्ञापन
Traveling to UK? Check MOT of car before you buy or Lease with checkmot.com®