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वसंत पंचमी 2020 :याद कर लीजिए आपकी राशि का विशेष सरस्वती मंत्र

गुरुवार,जनवरी 16, 2020
sarasvati mantra
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अगर आप मां सरस्वती के मंत्र और श्लोक नहीं जानते हैं तो वसंत पंचमी के दिन इन 11 नामों को 11 बार जपें। यश, विद्या, पराक्रम और बुद्धि के लिए बस यही 11 नाम पर्याप्त हैं। ये नाम असंभव को संभव बना देते हैं।
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वाणी, लेखनी, प्रेम, सौभाग्य, विद्या, कला, सृजन, संगीत और समस्त ऐश्वर्य को प्रदान करने वाली देवी मां सरस्वती से शुभ आशीष प्राप्त करने का दिन है वसंत (बसंत) पंचमी। मां शारदा के पूजन की सरलतम विधि है...
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वसंत पंचमी का शुभ और मंगलकारी पर्व इस बार दो दिन आ रहा है। 29 और 30 जनवरी को सरस्वती देवी की पूजा अर्चना की जाएगी। माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि में इस वर्ष 3 ग्रहों का स्वराशि योग निर्मित हो रहा है। मंगल वृश्चिक राशि पर, गुरु धन में और शनि ...
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सबसे पहले केसर के लच्छों को दूध में भिगो दें। अब मावे को माइक्रोवेव में एक मिनट के लिए गर्म करें। फिर इसे अच्छी तरह हिलाएं।
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- जो लोग सरस्वती के कठिन मंत्र का जप नहीं कर सक‍ते, उनके लिए प्रस्तुत है मां सरस्वती के सरल मंत्र।
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जो विद्या की देवी भगवती सरस्वती कुन्द के फूल, चंद्रमा, हिमराशि और मोती के हार की तरह धवल वर्ण की है और जो श्वेत वस्त्र धारण करती है, जिनके हाथ में वीणा-दण्ड शोभायमान है, जिन्होंने श्वेत कमलों पर आसन ग्रहण किया है तथा ब्रह्मा विष्णु एवं शंकर आदि ...
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वसंत पंचमी मां शारदा को प्रसन्न करने का दिन है। इस दिन अगर विधि-विधान से पूजन किया जाए तो मां सरस्वती विद्या, वाणी और प्रसिद्धि का आशीर्वाद देती है।
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यदि आप नास्तिक हैं तब भी आपके लिए यह दिवस महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि इसी दिन से जब प्रकृति के कण-कण में परिवर्तन हो रहा है तो स्वाभाविक ही आपके मन और बुद्धि में भी परिवर्तन हो ही रहा होगा। तब क्यों नहीं हम इस परिवर्तन को समझें। यह फिर से नया हो ...
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धर्मग्रंथों में देवी सरस्वती को सतरूपा, शारदा, वीणापाणि, वाग्देवी, भारती, प्रज्ञापारमिता, वागीश्वरी तथा हंस वाहिनी आदि नामों से भी संबोधित किया गया है। मां सरस्वती को सरस्वती स्तोत्र में ‘श्वेताब्ज पूर्ण विमलासन संस्थिते’ अर्थात श्वेत कमल पर ...
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सरस्वती पूजन के अवसर पर माता सरस्वती को पीले रंग का फल चढ़ाएं। प्रसाद के रूप में मौसमी फलों के अलावा बूंदी अर्पित करना चाहिए। इस दिन सरस्वती माता को मालपुए एवं खीर का भी भोग लगाया जाता है।
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हमने सरस्वती को यूं ही ज्ञान की देवी नहीं कहा। बड़े-बड़े कारण रहे हैं इन मिथकों पीछे। ऋषियों द्वारा दी गई एक ऋचा में उनका संपूर्ण जीवन अनुभव और ज्ञान छुपा था जिनसे ज्ञान की अनगिनत धाराएँ फूटी थीं। यूँ ही नहीं कह दिया 'सत्यमेव जयते' और 'संतोषं परमं ...
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मैं ऋतुओं में वसंत हूं : श्रीकृष्ण.... क्यों कहा ऐसा श्रीकृष्ण ने? क्योंकि प्रकृति का कण-कण वसंत ऋतु के आगमन में आनंद और उल्लास से गा उठता है। मौसम भी अँगड़ाई लेता हुआ अपनी चाल बदलकर मद-मस्त हो जाता है। प्रेमी-प्रेमिकाओं के दिल भी धड़कने लगते हैं। ...
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भगवान शिव ने तमोगुण से महाकाली, भगवान विष्णु ने रजोगुण से देवी लक्ष्मी तथा ब्रह्माजी ने सतोगुण से देवी सरस्वती का आह्वान किया। जब ये तीनों देवियां प्रकट हुईं,
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हिन्दू मान्यता के अनुसार वसंत पंचमी को अबूझ मुहूर्त माना जाता है। इस दिन बिना मुहूर्त जाने शुभ और मांगलिक कार्य किए जाते हैं।
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माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी से ऋतुओं के राजा वसंत का आरंभ हो जाता है। यह दिन नवीन ऋतु के आगमन का सूचक है। इसीलिए इसे ऋतुराज वसंत के आगमन का प्रथम दिन माना जाता है।
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वसंत ऋतु में पंचमी का उत्सव 'मां सरस्वती' के जन्मदिन के रूप में संपूर्ण भारत में मनाया जाता है। वसंत पंचमी सभी के लिए महत्व रखती है। इस दिन शुभ्रवसना, वीणावादिनी, मंद-मंद मुस्कुराती,
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वसंत पंचमी वाग्देवी सरस्वती का जन्मदिन माना जाता है। इस दिन आराधक सरस्वती की पूजा करते हैं। प्रेम के पर्व पर ज्ञान की देवी की आराधना केवल संयोग नहीं है।
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गाओ सखी होकर मगन आया है वसंत राजा है ये ऋतुओं का आनंद है अनंत। पीत सोन वस्त्रों से सजी है आज धरती आंचल में अपने सौंधी-सौंधी गंध भरती।
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मां सरस्वती के जन्मदिवस के रूप में हम वसंत पंचमी मनाते हैं। मां सरस्वती का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए उनकी आराधना राशि अनुसार करें। ज्ञान, बुद्धि और विवेक का शुभ आशीष पाएं..
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